सीजी भास्कर, 19 अगस्त : छत्तीसगढ़ में किसानों को उन्नत और जैविक खेती की ओर बढ़ाने के लिए कृषि विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। इसी कड़ी में सुगंधित जवाफुल धान की जैविक खेती और सन बीज उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। अधिकारियों ने किसानों के खेतों तक पहुंचकर फसल की स्थिति देखी और बेहतर कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया।
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लैलूंगा में कृषि अधिकारियों ने किया मैदानी भ्रमण
रायगढ़ जिले के लैलूंगा क्षेत्र में कृषि गतिविधियों और किसानों को मिल रहे योजनागत लाभों की जमीनी स्थिति जानने के लिए संयुक्त संचालक कृषि बिलासपुर आर.के. राठौर और उपसंचालक कृषि अनिल वर्मा ने संयुक्त भ्रमण किया। अधिकारियों ने किसानों के खेतों में पहुंचकर फसल की स्थिति का जायजा लिया।
भ्रमण की शुरुआत वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय लैलूंगा में कृषि विभाग के मैदानी अमले की बैठक से हुई। बैठक में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, एग्रीस्टैक, फसल स्थिति और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सहित विभिन्न कृषि योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने योजनाओं का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित करने और पात्र किसानों को समय पर लाभ दिलाने के निर्देश दिए।
जवाफुल धान की जैविक खेती का लिया जायजा
बारिश के बीच कृषि अधिकारियों ने किसानों के खेतों का निरीक्षण किया। इस दौरान लैलूंगा क्षेत्र में की जा रही सुगंधित जवाफुल धान की तकनीकी खेती का अवलोकन किया गया। अधिकारियों ने किसानों द्वारा अपनाई जा रही जैविक कृषि पद्धतियों, जीवामृत और हरी खाद के उपयोग की जानकारी ली।
Jawaphul Paddy अपनी विशिष्ट सुगंध और गुणवत्ता के कारण अलग पहचान रखता है। अधिकारियों ने इसकी बाजार मांग बढ़ाने और किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने के लिए एनपीओपी के तहत जैविक प्रमाणीकरण कराने पर जोर दिया। इससे किसानों को अपने उत्पाद के लिए बेहतर बाजार और प्रीमियम मूल्य हासिल करने में मदद मिल सकती है।
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सन बीज उत्पादन से किसानों को मिलेगा फायदा
संयुक्त संचालक ने किसानों को सन बीज उत्पादन कार्यक्रम की जानकारी दी। उन्होंने सन की खेती की तकनीक, बोनी की विधि और बेहतर उत्पादन के लिए जरूरी कृषि प्रबंधन के बारे में किसानों को समझाया।
किसानों को खेतों की मेड़ों पर हरी खाद के बीज का उत्पादन करने के लिए भी प्रेरित किया गया। इससे किसान अपने स्तर पर गुणवत्तापूर्ण बीज तैयार कर सकेंगे। इससे कृषि लागत कम करने के साथ बीज के लिए किसानों की निर्भरता भी घटेगी।
एफपीओ के जरिए सामूहिक विपणन पर जोर
जवाफुल धान के उत्पादन क्षेत्र को बढ़ाने और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए किसान उत्पादक संगठन यानी FPO के माध्यम से सामूहिक विपणन को बढ़ावा देने की बात कही गई। अधिकारियों ने कहा कि किसान संगठित होकर उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन की दिशा में आगे बढ़ें तो उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकता है।
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किसानों को तकनीकी और विपणन सहयोग का भरोसा
कृषि विभाग की ओर से किसानों को आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन और विपणन सहयोग उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया। विभाग का जोर जैविक खेती को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय और विशिष्ट फसलों को बेहतर बाजार से जोड़ने पर है।
जवाफुल धान की जैविक खेती और सन बीज उत्पादन से किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिल सकते हैं। साथ ही स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन और सामूहिक विपणन से किसानों की आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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