सीजी भास्कर, 21 जून : बस्तर जिले के करपावंड क्षेत्र में जमीन सीमांकन (Karpawand Violence Case) और कब्जा दिलाने पहुंची राजस्व एवं पुलिस की संयुक्त टीम पर हुए हमले के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने, पथराव करने, गाली-गलौज और राजस्व अधिकारियों के साथ मारपीट करने के आरोप में यह कार्रवाई की गई है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में प्रशासन और पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है।
वीडियो फुटेज से हुई पहचान, 14 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस अधिकारियों के अनुसार घटना के दौरान बनाए गए वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई। जांच में डाकेंद्र नेताम और मनीराम बघेल को मुख्य आरोपी माना गया है।
दोनों सहित कुल 14 लोगों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि मामले में शामिल अन्य संदिग्धों की भी पहचान की जा रही है और उनकी तलाश जारी है।
कोर्ट के आदेश पर पहुंची थी राजस्व और पुलिस टीम
जानकारी के अनुसार राजस्व विभाग की टीम उच्च राजस्व न्यायालय के आदेश के पालन में संबंधित भूमि का सीमांकन और कब्जा दिलाने के लिए मौके पर पहुंची थी। कार्रवाई के दौरान राजस्व निरीक्षक, पटवारी, कोटवार और पर्याप्त पुलिस बल मौजूद था।
इसी दौरान कुछ लोगों ने कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया, जिसके बाद विवाद बढ़ गया और हालात तनावपूर्ण हो गए। आरोप है कि भीड़ ने राजस्व अधिकारियों के साथ अभद्रता की, पथराव किया और राजस्व निरीक्षक के साथ मारपीट की।
राजस्व निरीक्षक के साथ मारपीट का आरोप
घटना के बाद राजस्व निरीक्षक की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया। शिकायत में शासकीय कार्य में बाधा डालने, सरकारी कर्मचारियों को धमकाने और हमला करने के आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर कार्रवाई शुरू की थी, जिसके बाद आरोपियों की गिरफ्तारी की गई।
ग्रामीणों ने सीमांकन प्रक्रिया पर उठाए सवाल
दूसरी ओर ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जिस नक्शे और दस्तावेजों के आधार पर सीमांकन किया जा रहा था, वह वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता।
ग्रामीणों का आरोप है कि राजस्व रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत में अंतर होने के कारण विवाद की स्थिति बनी। उनका कहना है कि सीमांकन से पहले स्थानीय पक्षों को पर्याप्त रूप से विश्वास में नहीं लिया गया।
फरार आरोपियों की तलाश जारी
पुलिस का कहना है कि मामले में शामिल कुछ अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने और कानून व्यवस्था बिगाड़ने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।





