सीजी भास्कर, 4 सितंबर। बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम रमतला की रहने वाली विजेता रामसनेही उर्फ अन्नू कोरी आज ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की प्रेरणा बन चुकी हैं। एक साधारण परिवार से आने वाली विजेता ने अपने अथक परिश्रम और तकनीक की समझ से रेशम उत्पादन के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
विजेता ने अकेले ही एक माह में 12 हजार कोसा बीज का उत्पादन कर रिकॉर्ड बनाया। इस उपलब्धि पर केंद्रीय रेशम बोर्ड ने उन्हें सम्मानित किया। उनकी मेहनत से न केवल परिवार को आर्थिक सहारा मिला, बल्कि पूरे क्षेत्र में उनका नाम एक मिसाल के रूप में लिया जा रहा है।
प्रशिक्षण से आत्मविश्वास, मेहनत से सफलता
पिछले 10 वर्षों से विजेता रमतला रेशम अनुसंधान एवं विकास केंद्र से जुड़ी हैं। शुरुआती दौर में उन्हें इस काम की ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन केंद्र से मिले प्रशिक्षण और मार्गदर्शन ने उन्हें नई दिशा दी। उन्होंने कहा – “रेशम उत्पादन बेहद कठिन और मेहनत भरा काम है, लेकिन मैंने हार नहीं मानी। लगातार प्रयास और धैर्य ने ही मुझे सफलता दिलाई।”
सम्मान और आय दोनों की उपलब्धि
कोरबा जिले के पाली विकासखंड के ग्राम डोंगानाला में आयोजित “मेरा रेशम, मेरा अभिमान” कार्यक्रम में केंद्रीय रेशम बोर्ड ने विजेता को विशेष सम्मान प्रदान किया। इस दौरान उन्होंने एक माह में तैयार किए गए 12 हजार कोसा बीजों से 40 हजार रुपये की आय भी अर्जित की।
उन्हें यह सम्मान केंद्रीय रेशम बोर्ड रांची के निदेशक डॉ. एन.बी. चौधरी, बिलासपुर के डॉ. नरेंद्र कुमार भाटिया और सीएस लोन्हारे ने प्रदान किया।
सरकारी योजनाओं से मिली मजबूती
रेशम उत्पादन के साथ विजेता मजदूरी कार्य भी करती हैं और अपनी मेहनत की आमदनी से परिवार को सहारा दिया है। उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना से पक्का घर, महतारी वंदन योजना से मासिक सहायता, श्रम विभाग बीमा योजना, बच्चों की छात्रवृत्ति योजना और बिहान योजना के तहत स्व-सहायता समूह से मछली पालन जैसी गतिविधियों से आय के नए स्रोत मिले।
पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा
विजेता ने कहा कि उन्हें केंद्र प्रभारी बी.पी. बंजारे और फील्डमैन नरेंद्र कुमार बरेठ से लगातार तकनीकी मार्गदर्शन मिलता रहा, जिसकी बदौलत वे सफलता हासिल कर पाईं। आज वे न केवल अपने परिवार को संबल दे रही हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणादायी उदाहरण बन चुकी हैं।



