सीजी भास्कर, 14 फरवरी। पिछले एक दशक से राजधानी में डायवर्सन शुल्क की वसूली लगभग (Land Diversion Fee Pending) ठप पड़ी है। आंकड़ों के मुताबिक करीब 8 करोड़ रुपये का डायवर्सन शुल्क बकाया है, लेकिन वसूली के नाम पर सिर्फ नोटिस जारी कर औपचारिकता निभाई जा रही है। सख्त कार्रवाई नहीं होने के कारण लोग हर साल देय डायवर्सन शुल्क जमा करने में रुचि नहीं दिखा रहे, जिससे सरकार को लगातार करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
इस साल भी तहसील कार्यालयों की ओर से 2000 से अधिक बकायादारों को नोटिस भेजे गए हैं, लेकिन इनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हैरानी की बात यह है कि बीते 10 से 15 वर्षों में डायवर्सन शुल्क नहीं देने वालों पर न तो जमीन जब्ती की कार्रवाई की गई और न ही निर्माण कार्यों पर रोक लगाई गई। इसी वजह से नोटिस को लोग गंभीरता से नहीं लेते और भुगतान टालते रहते हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि बड़े बकायादारों की सूची में अस्पताल संचालक, राइस मिलर, निजी स्कूल, पेट्रोल पंप संचालक और नए उद्योग लगाने वाले उद्योगपति (Land Diversion Fee Pending) शामिल हैं। इन लोगों ने कृषि भूमि का उपयोग आवासीय या व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए बदलवा लिया, लेकिन इसके बाद लगने वाला वार्षिक डायवर्सन शुल्क वर्षों से जमा नहीं किया।
सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि भारी बकाया होने के बावजूद जमीनों की खरीदी-बिक्री और रजिस्ट्री बेरोकटोक जारी है। राजस्व विभाग और पंजीयन विभाग के बीच कोई ऐसा समन्वित सॉफ्टवेयर नहीं है, जिससे यह पता चल सके कि संबंधित जमीन पर कितना डायवर्सन शुल्क बकाया है। कई मामलों में नोटिस मिलने के बाद जमीन बेच दी जाती है और जिम्मेदारी नए खरीदार पर डाल दी जाती है।
राजस्व विभाग का कहना है कि इस खामी को दूर करने के लिए नया सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है, जिससे डायवर्सन आवेदन के समय ही बकाया राशि की जानकारी सामने आ जाएगी। शुल्क जमा किए बिना अब भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि फिलहाल यह सिस्टम ट्रायल मोड में है और पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है।
नियमों के अनुसार, कृषि भूमि का लैंड यूज बदलने के बाद हर साल डायवर्सन शुल्क जमा करना (Land Diversion Fee Pending) अनिवार्य है। शुल्क नहीं देने की स्थिति में प्रशासन जमीन का उपयोग पुनः पूर्व स्थिति में ला सकता है या निर्माण कार्य पर रोक लगा सकता है। बावजूद इसके, अब तक ऐसी सख्त कार्रवाई का कोई ठोस उदाहरण सामने नहीं आया है।
प्रशासन का दावा है कि सभी तहसीलदारों को बकाया वसूली तेज करने और बार-बार नोटिस के बावजूद भुगतान नहीं करने वालों पर सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में डायवर्सन शुल्क की वसूली हर हाल में सुनिश्चित की जाएगी।




