सीजी भास्कर, 26 अगस्त : राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने (Liquor Scam in Chhattisgarh) के मामले में मंगलवार को विशेष न्यायालय रायपुर में अब तक का सबसे बड़ा चालान पेश किया।
लगभग आठ हजार पन्नों में दर्ज यह छठा चालान करीब 3,200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले से संबंधित है।
जांच में खुलासा हुआ कि विदेशी शराब कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों में हेरफेर किया गया और इसके चलते राज्य सरकार को 248 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।
चालान में विजय कुमार भाटिया, संजय मिश्रा, मनीष मिश्रा और अभिषेक सिंह को आरोपित बनाया गया है, जो फिलहाल जेल में निरुद्ध हैं। ईओडब्ल्यू ने बताया कि शेष कंपनियों से जुड़े लोगों के खिलाफ अलग से अभियोग पत्र दायर किया जाएगा।
सिंडीकेट का संगठित जाल
जांच से स्पष्ट हुआ कि तत्कालीन आबकारी विभाग के भीतर एक संगठित सिंडीकेट सक्रिय था।
इसमें प्रशासनिक अधिकारी अनिल टुटेजा, अरुणपति त्रिपाठी, निरंजन दास समेत कारोबारी अनवर ढेबर, विकास अग्रवाल और अरविंद सिंह शामिल थे।
इनके नियंत्रण में शराब सप्लाई, मार्केट शेयर और कमीशनखोरी से जुड़ी सभी गतिविधियां संचालित होती थीं। यही संगठित तंत्र (Liquor Scam in Chhattisgarh) का मुख्य कारण बना।
विदेशी शराब पर नई व्यवस्था
ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि कुछ विदेशी शराब कंपनियां नकद कमीशन देने के लिए तैयार नहीं थीं। इसे दूर करने के लिए वर्ष 2020-21 में नई आबकारी नीति लागू करवाई गई।
इस नीति के तहत एफएल-10ए/बी लाइसेंस की व्यवस्था शुरू हुई। इसके जरिए छत्तीसगढ़ ब्रेवरीज कार्पोरेशन को दरकिनार कर तीन निजी कंपनियों को सीधे विदेशी शराब खरीदने का अधिकार मिला।
ये कंपनियां विदेशी सप्लायरों से शराब खरीदकर उस पर 10% कमीशन जोड़कर राज्य मार्केटिंग कार्पोरेशन को बेचती थीं। यही 10% कमीशन सिंडीकेट और उनके नजदीकी लोगों में बांटा जाता था।
यही नीति (Liquor Scam in Chhattisgarh) के बड़े राजस्व नुकसान का आधार बनी।
तीन कंपनियों का बड़ा खेल
ओम सांई ब्रेवरीज प्रालि : अतुल सिंह और मुकेश मनचंदा की इस कंपनी में विजय कुमार भाटिया छिपे हुए लाभार्थी थे। जांच में सामने आया कि केवल इस कंपनी से भाटिया को लगभग 14 करोड़ रुपये का सीधा फायदा पहुंचा।
नेक्सजेन पावर इंजिटेक प्रालि : असल संचालन सीए संजय मिश्रा कर रहे थे। उनके साथ भाई मनीष मिश्रा और सिंडीकेट सदस्य अरविंद सिंह का भतीजा अभिषेक सिंह जुड़े थे। इस कंपनी ने हिस्सा बांटने के बाद भी लगभग 11 करोड़ रुपये का लाभ कमाया।
दिशिता वेंचर्स प्रालि : आशीष सौरभ केडिया की इस कंपनी को भी नई नीति से बड़ा फायदा मिला।
ईओडब्ल्यू की कार्रवाई जारी
ईओडब्ल्यू अधिकारियों ने बताया कि (Liquor Scam in Chhattisgarh) मामले में अभी और भी कंपनियों और अधिकारियों की भूमिका सामने आनी बाकी है। सभी आरोपितों से पूछताछ की जा रही है और जो भी नए तथ्य सामने आएंगे, उन्हें अदालत में रखा जाएगा।
राज्य में (Liquor Scam in Chhattisgarh) ने न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं, बल्कि राजस्व को भारी नुकसान भी पहुंचाया है।
ईओडब्ल्यू की जांच और चालान से यह साफ हो गया है कि संगठित सिंडीकेट ने निजी कंपनियों को नियम बदलकर अनुचित लाभ पहुंचाया।