सीजी भास्कर, 8 जनवरी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने (Mahadev Online Book Case) में बड़ी कार्रवाई करते हुए 91.82 करोड़ रुपये मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को अटैच किया है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत जारी प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (PAO) के माध्यम से की गई है। मामला महादेव ऑनलाइन बुक (MOB) और Skyexchange.com से जुड़े अवैध सट्टेबाजी संचालन से संबंधित है, जिसे देश के सबसे बड़े ऑनलाइन जुआ नेटवर्क में से एक माना जा रहा है।
ED रायपुर जोनल कार्यालय की जांच में सामने आया है कि इस (Mahadev Online Book Case) में सौरभ चंद्राकर, अनिल कुमार अग्रवाल और विकास छपारिया द्वारा अपराध से अर्जित धन (PoC) को वैध निवेश के रूप में छिपाने के लिए विदेशी और घरेलू कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। इसी कड़ी में मिस परफेक्ट प्लान इन्वेस्टमेंट LLC और M/s एक्जिम जनरल ट्रेडिंग-GZCO के नाम पर रखे गए 74.28 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक बैलेंस को अटैच किया गया है।
इसके अतिरिक्त, Skyexchange.com के मालिक हरि शंकर टिबरेवाल के करीबी सहयोगी गगन गुप्ता की लगभग 17.5 करोड़ रुपये की संपत्ति भी (Mahadev Online Book Case) के तहत अटैच की गई है। इन संपत्तियों में उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर खरीदी गई महंगी रियल एस्टेट और लिक्विड एसेट्स शामिल हैं, जिन्हें नकद PoC से खरीदा गया था। ED के अनुसार, ये संपत्तियां सीधे अवैध सट्टेबाजी से अर्जित धन से जुड़ी हुई हैं।
जांच में यह भी उजागर हुआ है कि महादेव ऑनलाइन बुक, Skyexchange.com और अन्य अवैध सट्टेबाजी ऐप्स ने हजारों करोड़ रुपये का अवैध फंड जनरेट किया। इस (Mahadev Online Book Case) में बेनामी बैंक खातों के जटिल नेटवर्क, जाली और चोरी किए गए KYC दस्तावेजों तथा लेयरिंग तकनीकों के जरिए धन को लॉन्डर किया गया। इन प्लेटफॉर्म्स को इस तरह डिजाइन किया गया था कि ग्राहक अंततः नुकसान में ही रहें, जबकि ऑपरेटरों को तय प्रॉफिट-शेयरिंग मॉडल के तहत भारी मुनाफा मिलता रहा।
ED की जांच में यह भी सामने आया है कि अवैध सट्टेबाजी से कमाई गई रकम को हवाला चैनलों, ट्रेड-बेस्ड मनी लॉन्ड्रिंग और क्रिप्टो-एसेट्स के माध्यम से भारत से बाहर भेजा गया। बाद में इसे विदेशी FPIs के नाम पर भारतीय शेयर बाजार में निवेश के रूप में वापस लाया गया। इस (Mahadev Online Book Case) में एक जटिल “कैशबैक स्कीम” भी उजागर हुई है, जिसमें भारतीय सूचीबद्ध कंपनियों के प्रमोटरों को निवेश की राशि का 30 से 40 प्रतिशत नकद में वापस किया जाता था।
अब तक ED इस मामले में 175 से अधिक स्थानों पर तलाशी ले चुकी है। जांच के दौरान लगभग 2,600 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त, फ्रीज या अटैच की जा चुकी है। इस (Mahadev Online Book Case) में 13 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि दायर की गई पांच अभियोजन शिकायतों में 74 कंपनियों को आरोपी बनाया गया है।




