सीजी भास्कर, 2 जुलाई। बस्तर सांसद महेश कश्यप (Mahesh Kashyap) ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जनप्रतिनिधि बनने के बाद भी उनका जुड़ाव अपनी मिट्टी और खेती-किसानी से आज भी उतना ही मजबूत है। मानसून की पहली बारिश के साथ जब बस्तर अंचल के किसान खरीफ फसल की तैयारी में जुटे हैं, उसी दौरान सांसद महेश कश्यप भी अपने पैतृक गांव में परिवार के साथ खेतों में हल जोतते नजर आए। उनका यह सादगीपूर्ण और जमीनी अंदाज अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
पीढ़ियों से जुड़ी है खेती-किसानी की परंपरा
बस्तर सांसद महेश कश्यप (Mahesh Kashyap) का परिवार पीढ़ियों से खेती-किसानी से जुड़ा रहा है। सांसद बनने के बाद भी उन्होंने अपनी पुश्तैनी परंपरा को नहीं छोड़ा। आज भी वे अपने परिवार के साथ खेतों की जोताई, फसलों की रोपाई, बुवाई और कटाई जैसे कृषि कार्यों में सक्रिय रूप से हिस्सा लेते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सार्वजनिक जीवन की व्यस्तताओं के बावजूद उनका खेती से जुड़ाव पहले की तरह बना हुआ है।
‘मिट्टी से जुड़ाव ही मेरी सबसे बड़ी ताकत’
खेत में कृषि कार्य के दौरान बस्तर सांसद महेश कश्यप ने कहा कि किसानी उनके जीवन का मूल आधार है और मिट्टी से जुड़ाव ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि पद और जिम्मेदारियां समय के साथ बदलती रहती हैं, लेकिन अपनी जड़ों और अपने मूल काम को कभी नहीं भूलना चाहिए। किसानों की खुशहाली और बस्तर का विकास उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
सांसद के सादगीपूर्ण अंदाज की हो रही सराहना
बस्तर सांसद महेश कश्यप का खेतों में परिवार के साथ काम करना स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि आज के समय में बहुत कम जनप्रतिनिधि ऐसे हैं, जो जिम्मेदारी मिलने के बाद भी अपनी खेती और गांव से जुड़े रहते हैं। खेतों में हल चलाते और कृषि कार्य करते सांसद को देखकर लोगों ने इसे बस्तर की माटी और किसानों के प्रति उनके समर्पण का प्रतीक बताया है।
युवाओं और किसानों के लिए बना प्रेरणा का संदेश
ग्रामीणों का मानना है कि बस्तर सांसद महेश कश्यप का यह व्यवहार युवाओं और किसानों दोनों के लिए प्रेरणादायक है। उनका कहना है कि खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और परंपरा की पहचान भी है। जनप्रतिनिधि का स्वयं खेत में उतरकर काम करना किसानों के सम्मान और कृषि के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।



