सीजी भास्कर, 08 जुलाई : सरगुजा जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को लेकर गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। मातृ मृत्यु (Maternal Death) की इस दर्दनाक घटना में आठ माह की गर्भवती महिला और उसके नवजात की घर पर प्रसव के दौरान मौत हो गई। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि महिला को पहले ही हाई रिस्क गर्भावस्था की श्रेणी में रखते हुए मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया था। डॉक्टरों और मितानिन ने कई बार अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी, लेकिन परिजनों ने इसे नजरअंदाज कर घर पर दाई से प्रसव कराया, जो मां और नवजात दोनों के लिए जानलेवा साबित हुआ।
हाई रिस्क गर्भावस्था के बावजूद नहीं पहुंची अस्पताल
जानकारी के अनुसार लखनपुर विकासखंड के ग्राम सकरिया निवासी 26 वर्षीय सुखनी मझवार अपने पति दिनेश मझवार के साथ तमिलनाडु में मजदूरी करती थी। वह 14 जून 2026 को गांव लौटी थी और करीब आठ माह की गर्भवती थी।
24 जून को गांव की मितानिन उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुन्नी लेकर पहुंची, जहां प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं की जांच की जा रही थी। जांच में सुखनी का हीमोग्लोबिन केवल 6.6 ग्राम और ब्लड प्रेशर 154/113 पाया गया। चिकित्सकों ने इसे गंभीर स्थिति मानते हुए अगले दिन आयरन सुक्रोज चढ़ाने के लिए बुलाया और बेहतर इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर रेफर कर दिया।
डॉक्टरों और मितानिन की सलाह को किया नजरअंदाज
चिकित्सकों ने रेफरल पर्ची पर स्पष्ट रूप से अस्पताल में भर्ती होने की सलाह लिखी थी। मितानिन ने भी परिजनों को कई बार समझाया कि महिला की स्थिति सामान्य नहीं है और संस्थागत प्रसव ही सुरक्षित रहेगा। इसके बावजूद परिवार ने अस्पताल जाने से इनकार कर दिया।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार गर्भवती महिला की नियमित निगरानी की जा रही थी, लेकिन जागरूकता की कमी और लापरवाही के कारण समय रहते उपचार नहीं मिल सका।
घर पर दाई से कराया प्रसव, दोनों की चली गई जान
6 जुलाई की सुबह करीब 9:30 बजे महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। अस्पताल ले जाने के बजाय परिजनों ने गांव में ही दाई को बुलाकर घर पर प्रसव कराया। समय से पहले प्रसव होने और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण जच्चा और नवजात दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।
परिजनों का कहना है कि प्रसव अचानक शुरू हो गया था और लगातार बारिश के कारण अस्पताल ले जाने में देरी हुई। हालांकि चिकित्सकों का कहना है कि महिला पहले से ही हाई रिस्क श्रेणी में थी और उसे समय रहते अस्पताल में भर्ती कराया जाता तो यह हादसा टाला जा सकता था।
स्वास्थ्य विभाग ने बताया क्यों था मामला गंभीर
डॉक्टरों के मुताबिक गर्भवती महिला का हीमोग्लोबिन सात ग्राम से कम और ब्लड प्रेशर 140/90 से अधिक होना गंभीर खतरे का संकेत माना जाता है। ऐसी स्थिति में घर पर प्रसव कराना बेहद जोखिम भरा होता है और केवल संस्थागत प्रसव ही सुरक्षित विकल्प माना जाता है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पी.एस. मार्को ने कहा कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत प्रत्येक गर्भवती महिला को नियमित जांच करानी चाहिए। यदि किसी महिला को हाई रिस्क घोषित किया जाता है तो चिकित्सकों की सलाह का पालन करते हुए तत्काल जिला अस्पताल या उच्च चिकित्सा संस्थान में भर्ती होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु सहित अन्य राज्यों से लौटने वाले श्रमिक परिवारों की गर्भवती महिलाओं पर विशेष निगरानी रखने के लिए मितानिन और एएनएम को निर्देश दिए गए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि समय पर जांच, जागरूकता और संस्थागत प्रसव से मातृ मृत्यु (Maternal Death) जैसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।



