सीजी भास्कर, 18 मई। महासमुंद जिले के एक गांव में इन दिनों एक खास किस्म की धान को लेकर लोगों के बीच खूब चर्चा (Medicinal Rice) हो रही है। खेतों में तैयार हो रही यह फसल देखने आसपास के किसान भी पहुंच रहे हैं। गांव में लोग इसे सामान्य धान से अलग मान रहे हैं, क्योंकि इसके स्वास्थ्य लाभों को लेकर लगातार बातें सामने आ रही हैं।
खेती करने वाले किसान का कहना है कि इस धान की मांग अब तेजी से बढ़ने लगी है। कई राज्यों से लोग पहले से संपर्क कर रहे हैं और फसल तैयार होने से पहले ही बुकिंग की जानकारी दे रहे हैं। औषधीय गुणों वाली इस धान ने इलाके के किसानों की रुचि भी बढ़ा दी है।
एक एकड़ में की जा रही खास खेती : Medicinal Rice
महासमुंद जिले के कौंदकेरा गांव के किसान योगेश्वर चंद्राकर इस समय संजीवनी धान की खेती कर रहे हैं। यह फसल पूरी तरह जैविक तरीके से तैयार की जा रही है। खेती में किसी तरह के रासायनिक खाद और कीटनाशक का उपयोग नहीं किया जा रहा। खेतों में गोमूत्र, पंचगव्य, नीमास्त्र, छाछ और जैविक खाद का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि धान के गुण सुरक्षित बने रहें।
सामान्य धान से अलग है इसकी खासियत
संजीवनी धान की फसल तैयार होने में करीब 145 दिन का समय लगता है। इसका पौधा सामान्य धान से काफी ऊंचा होता है और करीब 6 फीट तक बढ़ जाता है। तेज हवा और बारिश में फसल गिरने का खतरा बना रहता है, इसलिए खेतों में बांस और लोहे के सहारे पौधों को संभाला जाता है।
कई राज्यों से बढ़ रही मांग
जानकारों के मुताबिक इस धान में सामान्य किस्मों की तुलना में ज्यादा फाइटोकेमिकल्स पाए जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें ऐसे तत्व मौजूद हैं जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद (Medicinal Rice) कर सकते हैं। इसी वजह से भोपाल, दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र और ओडिशा समेत कई राज्यों से इसकी मांग बढ़ रही है।
खाने का तरीका भी अलग
इस धान की प्रोसेसिंग सामान्य चावल की तरह नहीं की जाती। इसका छिलका हाथ से निकाला जाता है। इसके चावल को सीधे पकाकर खाने के बजाय पानी में भिगोकर औषधि की तरह सेवन किया जाता है।
वैज्ञानिक शोध में भी मिले अच्छे संकेत
बताया जा रहा है कि इस धान पर वैज्ञानिक स्तर पर भी अध्ययन (Medicinal Rice) किया गया है। रायपुर के कृषि वैज्ञानिकों की सलाह से किसान ने इसकी खेती शुरू की थी। विशेषज्ञों का दावा है कि यह धान शरीर में खून की कमी दूर करने और कुछ गंभीर बीमारियों से बचाव में मददगार साबित हो सकता है।



