सीजी भास्कर, 05 सितंबर : अवैध खनन (Illegal Mining) और नदी में मलबा डंप करने के मामले में राज्य सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में दोषी पाए गए सभी लीजधारकों की माइनिंग लीज रद्द कर दी गई है। सरकार ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को बताया कि फिलहाल संबंधित क्षेत्र में कोई भी माइनिंग लीज संचालित नहीं हो रही है।
स्वीकृत क्षेत्र से बाहर खनन का आरोप
मामला रायपुर जिले के आरंग तहसील के निशदा गांव से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ओमप्रकाश सेन ने जनहित याचिका के जरिए आरोप लगाया था कि कुछ लीजधारक स्वीकृत क्षेत्र से बाहर जाकर फ्लोरिंग स्टोन का खनन कर रहे थे। आरोप यह भी था कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर खनन किया जा रहा था। खनन से निकलने वाले मलबे को महानदी में डंप किए जाने की शिकायत भी याचिका में की गई थी।
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जांच के बाद लीजधारकों पर कार्रवाई
मामले की जांच सक्षम अधिकारियों ने की। जांच के दौरान अनियमितताएं पाए जाने के बाद संबंधित लीजधारकों के खिलाफ कार्रवाई की गई। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने भी मामले में हस्तक्षेप किया। मंडल की ओर से संबंधित क्षेत्र में खनन गतिविधियों को रोकने के निर्देश दिए गए। जांच और कार्रवाई के बाद दोषी पाए गए सभी लीजधारकों की लीज निरस्त कर दी गई।
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अब क्षेत्र में कोई सक्रिय माइनिंग लीज नहीं
जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि संबंधित क्षेत्र में अब कोई सक्रिय माइनिंग लीज नहीं है। सरकार और पर्यावरण संरक्षण मंडल की कार्रवाई को देखते हुए कोर्ट ने फिलहाल मामले में आगे किसी कार्रवाई की जरूरत नहीं मानी।
इसके बाद हाईकोर्ट ने जनहित याचिका का निराकरण कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने भविष्य में अवैध खनन (Illegal Mining) की शिकायतों को लेकर निगरानी जारी रखने के निर्देश दिए हैं।
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नदी में डंपिंग पर होगी कार्रवाई
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में स्वीकृत लीज क्षेत्र से बाहर खनन किया जाता है या नदी में खनन का मलबा डंप किए जाने की शिकायत सामने आती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। इस मामले में हाईकोर्ट की सख्ती के बाद हुई कार्रवाई को अवैध खनन (Illegal Mining) पर प्रशासनिक और पर्यावरणीय निगरानी के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
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