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Home » Teacher To Politician Chhattisgarh : ब्लैकबोर्ड से विधानसभा तक पहुंचे छत्तीसगढ़ के नेता

Teacher To Politician Chhattisgarh : ब्लैकबोर्ड से विधानसभा तक पहुंचे छत्तीसगढ़ के नेता

By Newsdesk Admin
05/09/2026
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Teacher To Politician Chhattisgarh : ब्लैकबोर्ड से विधानसभा तक पहुंचे छत्तीसगढ़ के नेता
Teacher To Politician Chhattisgarh : ब्लैकबोर्ड से विधानसभा तक पहुंचे छत्तीसगढ़ के नेता

सीजी भास्कर, 05 सितंबर : शिक्षक दिवस पर छत्तीसगढ़ की राजनीति (Teacher To Politician Chhattisgarh)  के उन चेहरों की कहानी दिलचस्प है, जिन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत राजनीति से नहीं, बल्कि कक्षा और ब्लैकबोर्ड से की। किसी ने सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ाया, तो किसी ने कॉलेज में लेक्चरर या प्रोफेसर के रूप में अध्यापन किया। बाद में यही शिक्षक राजनीति में उतरे और विधायक, सांसद, मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक बने।

Contents
  • सरकारी शिक्षक से मंत्री और डिप्टी सीएम तक
  • शिक्षाकर्मी से विधायक और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष तक
  • शिक्षाकर्मी संगठन से निकले चंद्रदेव राय
  • क्लासरूम छोड़कर विधानसभा पहुंचीं सावित्री मंडावी
  • शिक्षक से सांसद और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बने विक्रम उसेंडी
  • अजीत जोगी का सफर शिक्षक से मुख्यमंत्री तक पहुंचा
  • नंदकुमार साय और सिद्धनाथ पैकरा भी रहे शिक्षक
  • ब्लैकबोर्ड से शुरू हुआ सफर, राजनीति तक पहुंचा

छत्तीसगढ़ की राजनीति में शिक्षक से नेता बनने का यह सफर (Teacher To Politician Chhattisgarh) कई पीढ़ियों में दिखाई देता है। इनमें कुछ नेता आज भी सक्रिय राजनीति में हैं, जबकि कुछ प्रदेश की राजनीतिक विरासत का हिस्सा बन चुके हैं।

 

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सरकारी शिक्षक से मंत्री और डिप्टी सीएम तक

रामविचार नेताम ने राजनीति में आने से पहले बलरामपुर क्षेत्र के चाकी गांव के शासकीय प्राथमिक स्कूल में शिक्षक के रूप में काम किया। वर्ष 1990 में उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद राज्य और केंद्र की राजनीति में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालते हुए मंत्री बने।

विजय शर्मा ने भौतिक शास्त्र में एमएससी करने के बाद 1996 से 1998 के बीच रायपुर के सेंट्रल कॉलेज, प्रगति कॉलेज और इंजीनियरिंग कॉलेज में फिजिक्स के लेक्चरर के रूप में काम किया। 2023 में कवर्धा से विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उन्हें राज्य सरकार में उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी मिली।

टंकराम वर्मा भी सरकारी शिक्षक रहे और शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद भाजपा से जुड़कर संगठन में सक्रिय हुए। 2023 में बलौदाबाजार से विधायक बने और बाद में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी संभाली।

 

 

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शिक्षाकर्मी से विधायक और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष तक

मोहन मरकाम ने शिक्षाकर्मी वर्ग-1 और वर्ग-2 के रूप में काम किया। बाद में नौकरी छोड़कर राजनीति में सक्रिय हुए। कांग्रेस से जुड़ने के बाद उनका राजनीतिक सफर आगे बढ़ा और 2008 में कोंडागांव से विधायक बने। वर्ष 2019 में उन्हें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली।

डोमनलाल कोर्सेवाड़ा ने 1972 में सहायक शिक्षक के रूप में नौकरी शुरू की। बाद में उच्च श्रेणी शिक्षक और व्याख्याता बने। करीब 26 साल शिक्षा के क्षेत्र में काम करने के बाद 1998 में सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद भाजपा की राजनीति में सक्रिय हुए और 2023 में अहिवारा से विधायक बने।

रामपुकार सिंह भी राजनीति में आने से पहले शिक्षक रहे। बाद में पत्थलगांव की राजनीति में सक्रिय हुए और कई बार विधायक बने। वर्ष 2018 में उन्हें विधानसभा में प्रोटेम स्पीकर की जिम्मेदारी भी मिली।

 

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शिक्षाकर्मी संगठन से निकले चंद्रदेव राय

चंद्रदेव राय ने 2003 में शिक्षाकर्मी के रूप में नौकरी शुरू की। बाद में शिक्षाकर्मी संगठन से जुड़े और कर्मचारी नेता के तौर पर सक्रिय हुए। इसी अनुभव ने उन्हें राजनीति की ओर बढ़ने का रास्ता दिया।

वर्ष 2018 में वे बिलाईगढ़ से विधायक बने। इसके बाद उन्हें संसदीय सचिव की जिम्मेदारी भी मिली। उनका राजनीतिक सफर बताता है कि कर्मचारी आंदोलनों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़ा अनुभव भी राजनीति में नई भूमिका का आधार बन सकता है।

 

 

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क्लासरूम छोड़कर विधानसभा पहुंचीं सावित्री मंडावी

सावित्री मनोज मंडावी रायपुर के कटोरा तालाब स्थित सरकारी स्कूल में लेक्चरर थीं। पति मनोज मंडावी के निधन के बाद उन्होंने 2022 में शिक्षिका की नौकरी छोड़ दी। इसके बाद भानुप्रतापपुर उपचुनाव में चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की।

राजनीति में आने के बाद भी उनका शिक्षा से जुड़ाव बना रहा। वर्ष 2024 में वे अपने पुराने स्कूल पहुंचीं और बच्चों को विज्ञान पढ़ाया।

सरायपाली की विधायक चातुरी नंद भी राजनीति में आने से पहले शासकीय व्याख्याता थीं। उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर 2023 में विधानसभा चुनाव लड़ा और पहली ही कोशिश में जीत हासिल की। विधायक बनने के बाद उन्होंने अपने पुराने स्कूल में जाकर बच्चों को विज्ञान पढ़ाया।

 

 

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शिक्षक से सांसद और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बने विक्रम उसेंडी

विक्रम उसेंडी ने भी अपने करियर की शुरुआत शिक्षक के रूप में की। बाद में भाजपा संगठन से जुड़े और सक्रिय राजनीति में आए। वे विधायक और सांसद रहे। इसके अलावा उन्होंने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली।

शिक्षा से राजनीति में आने वाले नेताओं (Teacher To Politician Chhattisgarh) की सूची में अरविंद नेताम, डॉ. शक्राजीत नायक, नंदकुमार साय, देवलाल दुग्गा और सिद्धनाथ पैकरा जैसे नाम भी शामिल रहे हैं।

 

 

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अजीत जोगी का सफर शिक्षक से मुख्यमंत्री तक पहुंचा

शिक्षक से राजनीति में आने वाले नेताओं में अजीत जोगी का सफर सबसे ऊंचे मुकाम तक पहुंचा। उन्होंने 1964-65 के दौरान रायपुर के इंजीनियरिंग कॉलेज में अध्यापन किया। इसके बाद वे आईएएस बने और फिर सक्रिय राजनीति में आए।

लोकसभा और राज्यसभा में रहने के बाद वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ के गठन के साथ अजीत जोगी राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने। उनका सफर ब्लैकबोर्ड से शुरू होकर प्रदेश के सर्वोच्च राजनीतिक पद तक पहुंचा।

 

 

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नंदकुमार साय और सिद्धनाथ पैकरा भी रहे शिक्षक

नंदकुमार साय शिक्षक रहने के बाद भाजपा के प्रमुख आदिवासी नेताओं में शामिल हुए। वे कई बार सांसद रहे। बाद में कांग्रेस में गए और राज्य सरकार में भी जिम्मेदारी संभाली। सिद्धनाथ पैकरा भी शिक्षक से राजनीति में आए। वे सामरी से विधायक बने और संसदीय सचिव की जिम्मेदारी संभाली। पुराने राजनीतिक दौर में झतिरूराम बघेल, राजाराम तोड़ेम, अंतूराम कश्यप, भुसरूराम नाग, अघन सिंह ठाकुर, मंतूराम पवार, संपत सिंह भंडारी, डॉ. रामलाल भारद्वाज और कृष्ण कुमार ध्रुव जैसे नेताओं का भी शुरुआती जुड़ाव शिक्षा के क्षेत्र से रहा।

 

 

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ब्लैकबोर्ड से शुरू हुआ सफर, राजनीति तक पहुंचा

छत्तीसगढ़ की राजनीति में शिक्षक से नेता बनने की कहानी (Teacher To Politician Chhattisgarh) कई दशकों में फैली हुई है। किसी ने बच्चों को पढ़ाने से शुरुआत की, तो किसी ने कॉलेज में अध्यापन किया। कुछ नेता शिक्षाकर्मी आंदोलन और कर्मचारी संगठनों के जरिए सार्वजनिक जीवन में आए।

इन नेताओं की राजनीतिक यात्राएं अलग-अलग रहीं, लेकिन एक समानता साफ दिखाई देती है। उनके सार्वजनिक जीवन की शुरुआत शिक्षा और समाज से जुड़ी रही। बाद में यही अनुभव उन्हें विधानसभा, संसद, मंत्रिमंडल और यहां तक कि मुख्यमंत्री पद तक ले गया।

 

 

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