सीजी भास्कर, 05 सितंबर : रायपुर में सीवेज और गंदे पानी की निकासी व्यवस्था (Raipur Sewerage Project) को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। शहर के लिए एक बड़ी एकीकृत योजना तैयार की जा रही है। इसमें सीवेज लाइन, ड्रेनेज और गंदे पानी के ट्रीटमेंट से जुड़े काम शामिल किए जा सकते हैं। प्रोजेक्ट की अधिकतम लागत 3500 करोड़ रुपए तक हो सकती है।
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केंद्र और राज्य मिलकर करेंगे खर्च
रायपुर के लिए प्रस्तावित सीवेज प्रोजेक्ट (Raipur Sewerage Project) में 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार व नगर निगम की ओर से लगाने का प्रावधान है। 3500 करोड़ रुपए की अधिकतम सीमा के हिसाब से केंद्र की हिस्सेदारी 2100 करोड़ और राज्य व नगर निगम की हिस्सेदारी 1400 करोड़ रुपए तक हो सकती है। हालांकि, अभी 3500 करोड़ रुपए मंजूर नहीं हुए हैं। वास्तविक राशि डीपीआर तैयार होने और प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने के बाद तय होगी।
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सीवेज लाइन और ड्रेनेज सिस्टम होगा मजबूत
प्रस्तावित फंड का इस्तेमाल वेस्टवॉटर मैनेजमेंट से जुड़े कामों में किया जाएगा। इसमें सीवेज नेटवर्क का विस्तार, गंदे पानी के ट्रीटमेंट प्लांट और ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत करने जैसे काम शामिल हो सकते हैं।
बारिश के पानी की निकासी व्यवस्था को बेहतर करने पर भी काम किया जा सकता है। योजना का उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों में छोटे काम करने के बजाय पूरे शहर की सीवेज और जल निकासी व्यवस्था को एकीकृत तरीके से मजबूत करना है।
आबादी के आधार पर 3500 करोड़ तक की सीमा
16वें वित्त आयोग की गाइडलाइन के तहत पात्र शहरों को वेस्टवॉटर मैनेजमेंट के लिए विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में शामिल किया गया है। 15 लाख से कम आबादी वाले पात्र शहरों के लिए 3500 करोड़ रुपए तक के प्रोजेक्ट की अधिकतम सीमा तय की गई है।
इसी आधार पर रायपुर के लिए भी 3500 करोड़ रुपए तक की परियोजना तैयार की जा सकती है। 16वें वित्त आयोग ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक देश के शहरी निकायों के लिए कुल 3.56 लाख करोड़ रुपए के अनुदान की सिफारिश की है।
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छत्तीसगढ़ के शहरी निकायों को 4990 करोड़
वित्त आयोग की सिफारिश के अनुसार छत्तीसगढ़ के शहरी निकायों के लिए बेसिक और परफॉर्मेंस ग्रांट के रूप में 4990 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं। इसी व्यवस्था के तहत रायपुर में सीवेज और ड्रेनेज से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की तैयारी है।
रायपुर का सीवेज प्रोजेक्ट (Raipur Sewerage Project) जरूरतों के आकलन के बाद तैयार किया जाएगा। इसके आधार पर डीपीआर बनाई जाएगी। फिर केंद्र और राज्य स्तर पर इसकी जांच और मंजूरी की प्रक्रिया होगी।
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डीपीआर के बाद शुरू होगा काम
प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने के बाद संबंधित पक्षों के बीच एमओयू किया जाएगा। इसके बाद काम शुरू हो सकेगा। केंद्र सरकार की राशि भी एकमुश्त जारी नहीं होगी। प्रोजेक्ट की प्रगति और राशि के उपयोग के आधार पर अलग-अलग किस्तों में फंड जारी किया जाएगा। पहली किस्त एमओयू के बाद मिलने की संभावना है। परियोजना पूरी होने के बाद इसके रखरखाव की जिम्मेदारी नगर निगम की होगी।
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इन शहरों को भी योजना में किया गया शामिल
विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर घटक में रायपुर के अलावा पुणे, जयपुर, लखनऊ, कानपुर, नागपुर, इंदौर, भोपाल, पटना, वडोदरा, लुधियाना, फरीदाबाद, राजकोट, धनबाद, अमृतसर, हावड़ा, रांची, कोयंबटूर, विजयवाड़ा, जोधपुर और मदुरै समेत देश के अन्य शहरों को भी शामिल किया गया है। इस योजना के जरिए शहरों में सीवेज ट्रीटमेंट और जल निकासी व्यवस्था को लंबे समय के लिए मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
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