सीजी भास्कर, 04 सितंबर : धान से गेंदा की खेती (Dhan Se Genda Ki Kheti) अपनाकर रायगढ़ के एक किसान ने कम जमीन में लाखों रुपये की कमाई कर दिखाई है। जिस खेत से पहले धान की खेती में महज 22 हजार रुपये का लाभ होता था, उसी 0.400 हेक्टेयर जमीन से गेंदा की खेती ने किसान की आमदनी में बड़ा बदलाव कर दिया।

धान की खेती से मिल रहा था सिर्फ 22 हजार का लाभ Dhan Se Genda Ki Kheti
रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड के ग्राम कोड़केल निवासी किसान आनंद राम सिदार पहले 0.400 हेक्टेयर जमीन में धान की खेती करते थे। इससे करीब 10 क्विंटल धान का उत्पादन होता था। धान बेचने पर लगभग 31 हजार रुपये की आय मिलती थी।
लागत घटाने के बाद किसान को करीब 22 हजार रुपये का लाभ होता था। वर्ष 2025-26 में उद्यानिकी विभाग ने उन्हें गेंदा फूल की खेती के लिए प्रोत्साहित किया।
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0.400 हेक्टेयर में पैदा हुआ 44 क्विंटल गेंदा
उद्यानिकी विभाग से तकनीकी जानकारी और मार्गदर्शन मिलने के बाद आनंद राम ने अपने 0.400 हेक्टेयर सिंचित खेत में गेंदा की खेती शुरू की। बेहतर प्रबंधन और नियमित देखरेख से उन्हें करीब 44 क्विंटल गेंदा फूल का उत्पादन मिला।
गेंदा की खेती (Dhan Se Genda Ki Kheti) से मिले फूलों की बिक्री से किसान को करीब 3 लाख 96 हजार रुपये की आय हुई।
55 हजार की लागत के बाद 3.41 लाख का मुनाफा
गेंदा की खेती में किसान ने करीब 20 हजार रुपये इनपुट लागत पर खर्च किए। श्रमिक लागत करीब 20 हजार रुपये रही। अन्य खर्च लगभग 15 हजार रुपये हुआ।
इस तरह कुल लागत करीब 55 हजार रुपये रही। 3.96 लाख रुपये की बिक्री आय में से लागत घटाने के बाद किसान को करीब 3 लाख 41 हजार रुपये का शुद्ध लाभ मिला।
यानी धान की खेती से मिलने वाले करीब 22 हजार रुपये के लाभ की तुलना में गेंदा की खेती (Dhan Se Genda Ki Kheti) से किसान को कई गुना ज्यादा फायदा हुआ।
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गांव के दूसरे किसान भी हुए प्रेरित
आनंद राम सिदार की सफलता देखकर गांव के दूसरे किसान भी फूलों की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। अब किसान पारंपरिक धान की खेती के साथ उद्यानिकी फसलों को भी विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
कई किसान राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत गेंदा क्षेत्र विस्तार जैसी योजनाओं का लाभ लेने में रुचि दिखा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार तकनीकी मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर किसान खेती में विविधता ला सकते हैं।
कम जमीन में बढ़ी आमदनी
आनंद राम की सफलता खेती में फसल विविधीकरण का उदाहरण है। धान की जगह गेंदा की खेती (Dhan Se Genda Ki Kheti) अपनाकर उन्होंने कम क्षेत्र में उत्पादन और आमदनी दोनों बढ़ाई।
इससे गांव के अन्य किसानों को भी पारंपरिक खेती के साथ फूलों और दूसरी उद्यानिकी फसलों को अपनाने की प्रेरणा मिल रही है।



