सीजी भास्कर, 30 अगस्त। फसल बीमा किसानों के लिए ऐच्छिक होने के बावजूद सहकारी समितियों से कर्ज लेने वाले किसानों के खातों से प्रीमियम स्वतः काटे जाने का मामला सामने आया है। बीमा नहीं कराने के इच्छुक किसानों को अंतिम तारीख से कम से कम सात दिन पहले बैंक या समिति में लिखित आवेदन देना होता है। आवेदन नहीं देने पर किसान को बीमा योजना में शामिल मानकर प्रीमियम काट लिया जाता है। (Chhattisgarh Crop Insurance)
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2020 से 2025 के बीच छत्तीसगढ़ से बीमा कंपनियों को कुल 7,897.14 करोड़ रुपए का प्रीमियम मिला। इसमें किसानों के साथ केंद्र और राज्य सरकार का अंशदान भी शामिल है। वहीं, इसी अवधि में किसानों को 2,394.54 करोड़ रुपए का क्लेम मिला। इस तरह प्रीमियम और क्लेम के बीच करीब 5,502.6 करोड़ रुपए का अंतर रहा।
कर्ज और खाद-बीज के लिए समितियों पर निर्भर किसान : Chhattisgarh Crop Insurance
सहकारी समितियों से किसानों को प्रति एकड़ करीब 16 हजार से 20 हजार रुपए तक नकद और खाद-बीज के रूप में कर्ज मिलता है। समितियों को फसल बीमा का लक्ष्य भी दिया जाता है। ऐसे में किसानों की समितियों पर निर्भरता होने के कारण वे प्रीमियम कटौती का विरोध करने से बचते हैं।
सिंचित धान के लिए किसान के खाते से प्रति हेक्टेयर 534 रुपए और असिंचित धान के लिए 383 रुपए प्रीमियम जमा होता है। केंद्र और राज्य सरकार का अंशदान जुड़ने के बाद बीमा कंपनी को क्रमशः 1,320 रुपए और 946 रुपए मिलते हैं। सिंचित धान के लिए 66 हजार रुपए और असिंचित धान के लिए 47,300 रुपए प्रति हेक्टेयर बीमा राशि निर्धारित है।

ऋणी और अऋणी किसानों का वित्तीय आंकड़ा अलग नहीं
फसल बीमा पोर्टल पर ऋणी और अऋणी किसानों के आवेदनों की संख्या अलग-अलग दिखाई जाती है, लेकिन प्रीमियम और क्लेम भुगतान का वित्तीय आंकड़ा एक साथ जारी होता है। इससे यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि स्वेच्छा से बीमा कराने वाले अऋणी किसानों को कितना क्लेम मिला और बैंक या समितियों के माध्यम से योजना से जुड़े ऋणी किसानों को कितना भुगतान हुआ।
तीन कंपनियों के पास अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी : Chhattisgarh Crop Insurance
फसल बीमा योजना के तहत अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी तीन बीमा कंपनियों को दी गई है। एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड के पास दुर्ग, बेमेतरा, बालोद, धमतरी, कांकेर, कोंडागांव, कोरबा, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, बिलासपुर और रायगढ़ समेत कई जिले हैं।
बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को रायपुर, बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, जशपुर, कबीरधाम, सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर और गरियाबंद समेत अन्य जिलों की जिम्मेदारी मिली है। एचडीएफसी एर्गो जनरल इंश्योरेंस कंपनी के पास महासमुंद, कोरिया और सुकमा समेत अन्य जिलों का काम है।
किसानों को नियमों की जानकारी देने की जरूरत
किसान संगठनों का कहना है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना महत्वपूर्ण है, लेकिन किसानों को इसके नियमों और बीमा से बाहर रहने की प्रक्रिया की पर्याप्त जानकारी नहीं है। भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष माधो सिंह के मुताबिक बीमा व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी है और किसानों को यह स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती कि प्रीमियम कटौती रोकने के लिए उन्हें क्या प्रक्रिया अपनानी है।



