सीजी भास्कर, 1 सितंबर 2026 : मेहनत, तकनीक और विभागीय मार्गदर्शन के सहारे सीमित संसाधनों (Scientific Fish Farming) से भी बेहतर आमदनी हासिल की जा सकती है। मनेन्द्रगढ़ विकासखंड के खोंगापानी की मत्स्य कृषक कामिनी रोहतिया ने इसका उदाहरण पेश किया है। उन्होंने वर्ष 2022 में करीब 1 हेक्टेयर के तालाब में वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन शुरू किया। आज इसी से उन्हें करीब 2 लाख रुपए सालाना लाभ मिल रहा है। वैज्ञानिक मत्स्य पालन (Scientific Fish Farming) ने उनकी आय और आत्मनिर्भरता दोनों को मजबूत किया है।

यह भी पढ़ें : Borai Police Station : सीमावर्ती राज्यों के पुलिस अधिकारियों की बैठक, माओवादी गतिविधियों और NDPS मामलों पर हुई चर्चा
मत्स्य पालन ने बदली आय की तस्वीर
मत्स्य पालन (Scientific Fish Farming) शुरू करने से पहले कामिनी मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर थीं। कृषि कार्य में मेहनत अधिक होने के बावजूद आय अपेक्षाकृत कम थी। वर्ष 2022 में मत्स्य विभाग की नवीन तालाब निर्माण योजना के तहत उन्हें करीब 1 हेक्टेयर तालाब निर्माण का लाभ मिला। इसके बाद उन्होंने तालाब को आजीविका का साधन बनाया।
विभाग ने उन्हें वैज्ञानिक तकनीक, तालाब प्रबंधन और मछलियों की देखभाल से जुड़ा तकनीकी मार्गदर्शन दिया। इसी के अनुसार उन्होंने तालाब में भारतीय प्रमुख कार्प (IMC) प्रजाति की मछलियों का पालन शुरू किया। तालाब में करीब 5 हजार फिंगरलिंग्स का स्टॉकिंग किया गया।

यह भी पढ़ें : Puri Jagannath Temple : 48 साल बाद खुली पुरी मंदिर के रत्न भंडार की पड़ताल, पुरानी सूची से मिल रहा खजाने का ब्यौरा
वैज्ञानिक प्रबंधन से बढ़ा उत्पादन
कामिनी तालाब में पानी की गुणवत्ता की नियमित निगरानी करती हैं। मछलियों की देखभाल और तालाब प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान देती हैं। मत्स्य विभाग से मिले प्रशिक्षण के अनुसार उन्होंने मछलियों में होने वाली संभावित बीमारियों की पहचान और रोकथाम की जानकारी भी हासिल की।
वैज्ञानिक मत्स्य पालन (Scientific Fish Farming) का असर उनकी आय पर साफ दिखाई दिया। करीब 1 हेक्टेयर तालाब से उन्हें अब लगभग 2 लाख रुपए का वार्षिक लाभ मिल रहा है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और वे पहले से अधिक आत्मनिर्भर बनी हैं।

यह भी पढ़ें : Chhattisgarh Train Cancel : रेलवे का बड़ा ब्लॉक, सितंबर-अक्टूबर में कई ट्रेनें कैंसिल, देखें लिस्ट
विभागीय मार्गदर्शन बना सफलता की कुंजी
कामिनी के अनुसार मत्स्य विभाग से समय-समय पर मिले तकनीकी मार्गदर्शन ने उन्हें तालाब प्रबंधन, मत्स्य बीज संचयन, मछलियों की देखभाल और उत्पादन बढ़ाने में मदद की। उनका कहना है कि तालाब का सही प्रबंधन और वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन किया जाए तो सीमित संसाधनों में भी अच्छी आय हासिल की जा सकती है। वर्ष 2022 से मत्स्य पालन (Scientific Fish Farming) करते हुए उन्होंने तालाब प्रबंधन और मछलियों की देखभाल का व्यावहारिक अनुभव हासिल किया है। अब उनका लक्ष्य उत्पादन और आय को और बढ़ाना है।
अन्य किसानों के लिए बनी मिसाल
कामिनी अन्य किसानों को भी उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और वैज्ञानिक पद्धति अपनाने की सलाह देती हैं। उनका अनुभव बताता है कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर और विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार काम करके मत्स्य पालन को लाभदायक आजीविका बनाया जा सकता है।
वैज्ञानिक मत्स्य पालन (Scientific Fish Farming) ने कामिनी के लिए न सिर्फ आय का नया रास्ता खोला, बल्कि आत्मनिर्भरता की राह भी मजबूत की। उनका सफल अनुभव ग्रामीण परिवारों के लिए प्रेरणा बन रहा है। सही योजना, तकनीक और मेहनत से एक साधारण तालाब भी आर्थिक मजबूती का आधार बन सकता है।
खबरें और भी हैं : Junwani Road Bridge : विधायक रिकेश के प्रयास रंग लाए दशकों पुराने पुल की बदलेगी तस्वीर, 10.67 करोड़ मंजूर




