सीजी भास्कर, 01 सितंबर। कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद भी राजधानी में हत्या की घटनाएं थम (Raipur murder cases) नहीं रही हैं। 221 दिनों में रायपुर कमिश्नरेट क्षेत्र में 19 हत्याएं सामने आई हैं। इनमें अगस्त सबसे ज्यादा संवेदनशील रहा, जब अकेले 10 हत्या के मामले दर्ज हुए।

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कई मामलों में उधारी, पारिवारिक विवाद, आपसी रंजिश और निजी बातों को लेकर शुरू हुआ मामूली झगड़ा खूनी वारदात में बदल गया। जनवरी में समता कॉलोनी में दुर्गेश ध्रुव की हत्या से इस साल का सिलसिला शुरू हुआ था।
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मार्च-अप्रैल में लेन-देन और पारिवारिक विवाद को लेकर हत्याएं हुईं। मई में मोवा की घटना में एक ही वारदात में दो महिलाओं की मौत हुई। जून-जुलाई में भी तीन हत्या के मामले सामने आए।
अगस्त में स्थिति और गंभीर रही। महीने की शुरुआत में ही एक सप्ताह के भीतर पांच हत्याएं सामने आ गईं। इसके बाद गंज, आमानाका, गुढ़ियारी और डीडी नगर थाना क्षेत्रों में भी हत्या की घटनाएं हुईं।
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पुलिस ने अधिकांश मामलों में आरोपियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन लगातार हो रही हत्याओं ने शहर की कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खास बात यह है कि कई वारदातों के पीछे बेहद छोटे विवाद कारण बने।
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