सीजी भास्कर, 05 सितंबर : बालोद में 59 दिनों से लोगों के बीच दहशत का कारण बना घायल भालू (Bear Rescue Balod) आखिरकार वन विभाग की पकड़ में आ गया। पिछले पैर में गंभीर चोट के बावजूद वह लगातार भोजन की तलाश में आबादी वाले इलाकों तक पहुंच रहा था। वन विभाग ने उसे पकड़ने के लिए खास रणनीति अपनाई और आखिरकार गुड़-नारियल के लालच में भालू पिंजरे में पहुंच गया।
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रानीमाई मंदिर के पास से किया गया रेस्क्यू
घायल भालू (Bear Rescue Balod) पिछले 59 दिनों से रानीमाई मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में घूम रहा था। उसके पिछले दाहिने पैर में गंभीर चोट थी। इसके चलते वह करीब डेढ़ महीने से तीन पैरों पर चल रहा था। शाम होते ही भालू भोजन की तलाश में मंदिर और आसपास के गांवों की ओर पहुंच जाता था। उसकी लगातार मौजूदगी से ग्रामीणों और मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं में चिंता बनी हुई थी।
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16 जुलाई को सामने आया था घायल भालू
भालू (Bear Rescue Balod) की मौजूदगी पहली बार 16 जुलाई को सामने आई थी। उस समय घायल भालू के सड़क पार करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में उसके पिछले पैर में चोट साफ दिखाई दे रही थी और वह लंगड़ाकर चलता नजर आया था।
इसके बाद वन विभाग की टीम ने उसकी गतिविधियों पर लगातार निगरानी शुरू की। टीम ने पैरों के निशान और उसके आने-जाने के रास्तों को ट्रैक किया। बाद में पता चला कि भालू शाम के समय नियमित रूप से रानीमाई मंदिर की ओर आता है।
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होटल की भजिया और कड़ाही का तेल था पसंद
ग्रामीणों के मुताबिक भालू (Bear Rescue Balod) भोजन की तलाश में आसपास के होटलों तक भी पहुंच जाता था। वहां बची हुई भजिया खाने की बात सामने आई। बताया गया कि एक बार उसने कड़ाही में रखा तेल भी पी लिया था।
मंदिर परिसर में जलाए जाने वाले दीपकों का तेल पीने की बात भी सामने आई। भोजन की तलाश में आबादी के करीब पहुंचने के कारण वन विभाग के सामने उसे सुरक्षित तरीके से पकड़ने की चुनौती थी।
गुड़-नारियल की खुशबू से पिंजरे में पहुंचा
भालू (Bear Rescue Balod) की गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग ने रेस्क्यू की योजना बनाई। उसके आने वाले स्थान पर पिंजरा लगाया गया। पिंजरे के अंदर गुड़ और नारियल रखा गया। रात में भालू पिंजरे तक पहुंचा। गुड़ और नारियल की खुशबू से आकर्षित होकर वह अंदर चला गया। इसके बाद पिंजरा बंद हो गया और वन अमले ने उसे सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर लिया।
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इलाज के लिए रायपुर जंगल सफारी भेजा गया
घायल भालू (Bear Rescue Balod) के पैर में गंभीर चोट होने के कारण उसे तत्काल उपचार की जरूरत थी। रेस्क्यू के बाद उसे रायपुर स्थित जंगल सफारी भेजा गया है। यहां वन्यजीव विशेषज्ञ उसकी स्वास्थ्य जांच करेंगे और घायल पैर का उपचार किया जाएगा। इलाज के बाद भालू की स्थिति में सुधार होने पर उसे उसके प्राकृतिक वातावरण यानी जंगल में वापस छोड़ने की तैयारी की जाएगी।
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बालोद के कई इलाकों में दिख रहे भालू
बालोद जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में भालुओं की मौजूदगी की घटनाएं सामने आती रही हैं। डौंडी, दल्लीराजहरा और बालोद वन परिक्षेत्र के अलावा गुरुर के सियादेवी और नारागांव क्षेत्र में भी भालू देखे जाने की सूचनाएं मिल चुकी हैं।
दल्लीराजहरा के माइंस क्षेत्र के वार्ड-1 और वार्ड-2 तथा राजहरा बाबा क्षेत्र में भी भालू की गतिविधियां सामने आई हैं। कुछ दिन पहले जिला अस्पताल परिसर में आधी रात भालू घूमता मिला था। पर्यावरण पार्क और तांदुला बांध के आसपास भी भालू देखे जाने की घटनाएं हो चुकी हैं। 59 दिनों बाद घायल भालू के रेस्क्यू से ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने राहत की सांस ली है। अब वन विभाग का फोकस उसके इलाज और स्वस्थ होने के बाद सुरक्षित पुनर्वास पर है।
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