सीजी भास्कर, 13 जून। बिहार के बक्सर जिले से सामने आई एक हैरान करने वाली घटना इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय (Mobile Tower Theft) बनी हुई है। इलाके में जब एक बंद पड़े संचार टावर की जांच के लिए टीम पहुंची तो वहां का नजारा देखकर सभी दंग रह गए। जिस जगह वर्षों से विशाल ढांचा खड़ा था, वहां अब सिर्फ खाली जमीन दिखाई दे रही थी।
स्थानीय लोगों के बीच भी इस घटना को लेकर तरह तरह की बातें होने लगीं। इतने बड़े ढांचे के अचानक गायब हो जाने की खबर फैलते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और मामले ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
निरीक्षण करने पहुंची टीम रह गई हैरान : Mobile Tower Theft
मामला डुमराव थाना क्षेत्र का है, जहां करीब 132 फीट ऊंचा मोबाइल टावर गायब मिलने की शिकायत दर्ज कराई गई है। कंपनी की तकनीकी टीम लंबे समय से बंद पड़े टावर का निरीक्षण करने और उसे दोबारा चालू करने पहुंची थी।
मौके पर पहुंचने के बाद अधिकारियों ने देखा कि वहां न तो टावर मौजूद है और न ही उससे जुड़े अन्य उपकरण। यह देखकर टीम के सदस्यों के होश उड़ गए।
जनरेटर और उपकरण भी नहीं मिले
जानकारी के अनुसार टावर के साथ लगा 15 केवीए का जनरेटर और कई दूरसंचार उपकरण भी वहां से गायब पाए गए। बताया गया कि यह ढांचा जीटीएल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कंपनी का था, जो लंबे समय से तकनीकी कारणों के चलते उपयोग में नहीं था। कंपनी के अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लेने के बाद तुरंत पुलिस से संपर्क किया और पूरे मामले की जानकारी दी।
अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज हुई शिकायत
घटना सामने आने के बाद कंपनी की ओर से डुमराव थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई (Mobile Tower Theft) गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जिला पुलिस के अनुसार मामले की हर पहलू से पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कई पहलुओं पर जांच
पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि इतने बड़े ढांचे को हटाने के पीछे किसी संगठित गिरोह का हाथ है या मामला किसी अन्य विवाद से जुड़ा हुआ है। जांच टीम आसपास के लोगों से भी पूछताछ कर रही है।
अधिकारियों का मानना है कि इतने बड़े ढांचे को हटाने के लिए पर्याप्त संसाधनों और समय की जरूरत होती है, इसलिए मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है।
जमीन को लेकर भी सामने आया विवाद
जिस जमीन पर यह टावर स्थापित था, उसके मालिक हरिनाद यादव ने बताया कि कंपनी के साथ (Mobile Tower Theft) हुआ 12 साल का समझौता वर्ष 2022 में समाप्त हो चुका था। उनका कहना है कि वर्ष 2017 के बाद से उन्हें किराये का भुगतान भी नहीं किया गया।
उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में कई बार नोटिस भेजे गए थे, लेकिन कंपनी की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। अब पुलिस जमीन से जुड़े इस पहलू की भी जांच कर रही है ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।




