सीजी भास्कर, 23 जून : राजधानी रायपुर के चर्चित ड्रग्स कांड में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री हो गई है। कथित ड्रग्स क्वीन नाव्या मलिक से जुड़े मामले में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग, अवैध कमाई और पैसों के नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है। एजेंसी ने मामले से संबंधित चार्जशीट, केस डायरी और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों की प्रतियां पुलिस से मांगी हैं। ईडी की जांच शुरू होने के बाद इस पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों में हलचल बढ़ गई है। Navya Malik Drugs Case में अब जांच का दायरा और बढ़ गया है। ईडी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित ड्रग्स कारोबार से अर्जित धन को कहां निवेश किया गया, किसके माध्यम से लेन-देन हुआ और क्या इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के तत्व मौजूद हैं। एजेंसी वित्तीय दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच कर सकती है।
मनी ट्रेल पर ईडी की नजर
प्रवर्तन निदेशालय की प्राथमिक जांच ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े वित्तीय लेन-देन पर केंद्रित है। एजेंसी यह जानने का प्रयास कर रही है कि अवैध कारोबार से कमाए गए धन को किस प्रकार विभिन्न खातों, संपत्तियों या अन्य माध्यमों से खपाया गया। जांच में कई नए नाम भी सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
चार्जशीट और रिकॉर्ड की मांगी गई प्रतियां
सूत्रों के अनुसार ईडी ने रायपुर पुलिस से मामले में प्रस्तुत चार्जशीट, जांच रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों की प्रतियां मांगी हैं। पुलिस पहले ही इस मामले में अदालत में चार्जशीट पेश कर चुकी है और प्रकरण का ट्रायल जारी है।
अब ईडी इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर वित्तीय पहलुओं की स्वतंत्र जांच करेगी। एजेंसी का फोकस ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े पैसों के स्रोत, निवेश और लेन-देन की पूरी श्रृंखला को समझने पर रहेगा।
2025 में हुआ था मामले का खुलासा
इस चर्चित मामले का खुलासा 23 अगस्त 2025 को हुआ था, जब पुलिस ने हर्ष आहूजा, मोनू विश्नोई और दीप धनोरिया को एमडीएमए के साथ गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने मुंबई में कार्रवाई करते हुए नाव्या मलिक को गिरफ्तार किया था।
नाव्या मलिक मूल रूप से रायपुर के कटोरा तालाब क्षेत्र की निवासी बताई जाती है। जांच में आरोप लगाया गया था कि वह शहर की हाईप्रोफाइल पार्टियों और निजी आयोजनों तक ड्रग्स की सप्लाई से जुड़ी हुई थी।
डिजिटल नेटवर्क के जरिए संचालित होता था कथित कारोबार
पुलिस जांच के अनुसार पूरे नेटवर्क का संचालन मोबाइल फोन और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाता था। जांच एजेंसियों का मानना है कि समय के साथ इस नेटवर्क का दायरा बढ़ता गया और इसके संपर्क प्रभावशाली लोगों तक पहुंच गए।
जांच में यह भी सामने आया था कि ड्रग्स की आपूर्ति और संपर्क बनाए रखने के लिए डिजिटल संचार माध्यमों का व्यापक उपयोग किया जाता था। अब ईडी इन इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की भी जांच कर सकती है।
पुलिस जांच में नाव्या को माना गया था मास्टरमाइंड
पुलिस की जांच में नाव्या मलिक को पूरे कथित नेटवर्क का प्रमुख संचालक माना गया था। गिरफ्तारी के बाद उसके कब्जे से जब्त मोबाइल फोन से कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई थीं।
जांच में दावा किया गया था कि उसके संपर्क में बड़ी संख्या में प्रभावशाली लोग थे। पुलिस ने कहा था कि मोबाइल डेटा और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर कई व्यक्तियों की पहचान की गई है, जिनकी भूमिका की अलग-अलग स्तर पर जांच की गई।
850 से अधिक लोगों के नाम आए थे सामने
जांच के दौरान कथित रूप से 850 से अधिक ऐसे लोगों के नाम सामने आए थे, जिनका किसी न किसी रूप में ड्रग्स नेटवर्क से संपर्क बताया गया था। इनमें कारोबारी, होटल व्यवसाय से जुड़े लोग, क्लब प्रबंधन, ऑटोमोबाइल कारोबारी और अन्य प्रभावशाली वर्गों के लोगों के नाम भी चर्चा में आए थे।
हालांकि जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया था कि किसी व्यक्ति का नाम सामने आना और उसके खिलाफ अपराध सिद्ध होना अलग-अलग बातें हैं। इसलिए सभी मामलों की जांच तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।
ED की जांच से खुल सकते हैं नए राज
कानूनी जानकारों का मानना है कि ईडी की एंट्री के बाद मामला केवल ड्रग्स तस्करी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अवैध धन के प्रवाह, संपत्तियों और आर्थिक लाभ के पहलुओं की भी गहन जांच होगी। यदि मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है।





