सीजी भास्कर 6 फ़रवरी नई दिल्ली। Netflix Teaser Controversy के बीच अभिनेता मनोज बाजपेयी की आगामी फिल्म घूसखोर पंडत सुर्खियों में आ गई है। फिल्म का टीज़र रिलीज़ से पहले ही विवादों में घिर गया, जिसके बाद इसे सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से हटा लिया गया है। मामला फिल्म के शीर्षक से जुड़ा है, जिसे लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई थी।
लखनऊ में दर्ज हुई FIR
जानकारी के अनुसार, लखनऊ के हजरतगंज थाना क्षेत्र में फिल्म के टाइटल को लेकर FIR दर्ज की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि फिल्म का नाम एक विशेष समुदाय की छवि को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत करता है। इस मुद्दे को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से विरोध भी सामने आया।
प्रमोशनल कंटेंट हटाने का फैसला
विवाद के बढ़ने के बाद फिल्म से जुड़े सभी प्रमोशनल वीडियो और टीज़र को सोशल मीडिया व अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से हटा दिया गया। निर्माताओं का कहना है कि यह फैसला सार्वजनिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि अनावश्यक तनाव की स्थिति न बने।
नीरज पांडे की स्पष्ट प्रतिक्रिया
फिल्म के लेखक नीरज पांडे ने इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह फिल्म पूरी तरह काल्पनिक कहानी पर आधारित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘पंडत’ शब्द का प्रयोग किसी धर्म, जाति या समुदाय को लक्ष्य बनाकर नहीं किया गया है, बल्कि यह एक फिक्शनल किरदार की पहचान भर है।
‘कहानी व्यक्ति की है, समुदाय की नहीं’
नीरज पांडे ने आगे कहा कि फिल्म का केंद्र एक व्यक्ति विशेष की सोच, उसकी कमजोरियां और उसके आत्मबोध की यात्रा है। इसका उद्देश्य किसी सामाजिक या धार्मिक वर्ग पर टिप्पणी करना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि एक रचनाकार के तौर पर वे सामाजिक संवेदनशीलता को गंभीरता से लेते हैं।
मनोज बाजपेयी ने जताया सम्मान
अभिनेता मनोज बाजपेयी ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वे लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हैं और जब किसी रचना से किसी वर्ग को ठेस पहुंचती है, तो उस पर विचार करना जरूरी हो जाता है। उनके अनुसार, यह भूमिका एक गलत व्यक्ति की कहानी है, न कि किसी समुदाय का प्रतिनिधित्व।
आगे की रणनीति पर सस्पेंस
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि फिल्म का टाइटल बदला जाएगा या नहीं, लेकिन मेकर्स की ओर से संकेत दिए गए हैं कि आगे का हर कदम कानूनी सलाह और सामाजिक प्रतिक्रिया को ध्यान में रखकर उठाया जाएगा।




