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Home » Niyad Nellanar Phase 2 Bastar : लाल आतंक के आखिरी गढ़ में सरकार की सबसे बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक

Niyad Nellanar Phase 2 Bastar : लाल आतंक के आखिरी गढ़ में सरकार की सबसे बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक

By Newsdesk Admin
29/05/2026
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Niyad Nellanar Phase 2 Bastar
Niyad Nellanar Phase 2 Bastar

सीजी भास्कर, 29 मई : छत्तीसगढ़ का बस्तर, एक ऐसा इलाका जो दशकों से गोलियों की गूंज, बारूदी गंध और अपनों को खोने के दर्द से कराह रहा है। यहां के सुदूर वनांचलों में रहने वाले आदिवासियों ने पीढ़ियों से सिर्फ डर और अभाव की जिंदगी देखी है। लेकिन अब, इसी बस्तर की फिजा बदलने के लिए राजधानी रायपुर के मंत्रालय महानदी भवन के बंद कमरे में एक ऐसा मास्टरप्लान तैयार किया गया है, जो बस्तर के इतिहास में सबसे बड़ा यू-टर्न साबित होने जा रहा है।

Contents
  • नक्सलियों के समानांतर दावों की हवा उड़ेगी
  • हर ग्रामीण का बनेगा डिजिटल लेखा-जोखा
  • हर किसी को मिलेगा सुरक्षा कवच
  • किसानों और युवाओं को मिलेगा संबल
  • आदिवासियों को मिलेगी उनकी असली पहचान
  • 14 सामुदायिक सुविधाओं से ढहेगा माओवाद का किला
  • मंत्रालय में जुटे आला अफसर, मुख्य सचिव ने दी अंतिम चेतावनी

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कड़े रुख के बाद प्रशासनिक अमला हरकत में आया और मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में एक हाई-प्रोफाइल बैठक बुलाई गई। इस बैठक का जो एजेंडा बाहर निकलकर आया है, उसने साफ कर दिया है कि सरकार अब नक्सलियों को उनके ही गढ़ में घेरने के लिए विकास की ऐसी चौतरफा घेराबंदी करने जा रही है, जिसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की थी। बस्तर के सुदूर अंचलों में सुरक्षा बलों के बढ़ते कदमों के साथ ही अब शासन की सबसे बड़ी जनकल्याणकारी योजना नियद नेल्लानार 2.0 (Niyad Nellanar Phase 2 Bastar) को पूरी तरह से लागू करने का फरमान जारी कर दिया गया है। यह सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह माओवाद की रीढ़ की हड्डी पर विकास का वो सबसे बड़ा प्रहार है, जो बस्तर के सुदूर कोनों में छिपे आदिवासियों को उनका खोया हुआ अधिकार वापस दिलाएगा।

नक्सलियों के समानांतर दावों की हवा उड़ेगी

बस्तर के जिन इलाकों में कभी नक्सलियों की तथाकथित ‘जनता सरकार’ चलती थी, जहां सरकारी तंत्र का पहुंचना नामुमकिन माना जाता था, अब उन जगहों पर सरकार सीधे तौर पर अपना हक जताने जा रही है। मुख्य सचिव विकासशील ने साफ कर दिया है कि नियद नेल्लानार योजना के पहले चरण की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि बस्तर का आम आदिवासी विकास चाहता है, न कि बंदूक।

पहले चरण में बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, कांकेर और नारायणपुर जैसे घोर नक्सल प्रभावित जिलों में सुरक्षा कैंपों के आसपास के गांवों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई गई थीं। तब सरकार ने 25 हितग्राही मूलक और 14 सामुदायिक सुविधाएं ग्रामीणों के घरों तक पहुंचाई थीं। लेकिन इस बार, ‘नियद नेल्लानार 2.0’ के तहत सरकार ने जो लक्ष्य तय किया है, वो माओवादियों के हौसले पस्त करने के लिए काफी है।

अब सरकार सुरक्षा कैंपों की ओट से बाहर निकलकर सुदूर अंचलों में रहने वाले हर एक ग्रामीण के घर का दरवाजा खटखटाएगी और यह सुनिश्चित करेगी कि वामपंथ उग्रवाद से मुक्त हुए इन क्षेत्रों में जनकल्याणकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ (Niyad Nellanar Phase 2 Bastar) हर एक नागरिक को मिले। इसके लिए एक व्यापक संतृप्तिकरण (सैचुरेशन) अभियान शुरू होने जा रहा है, जो बस्तर के कोने-कोने से माओवाद के वैचारिक आधार को हमेशा के लिए उखाड़ फेंकेगा।

हर ग्रामीण का बनेगा डिजिटल लेखा-जोखा

इस बार की कार्ययोजना इतनी आक्रामक और सस्पेंस से भरी है कि नक्सलियों को संभलने का मौका भी नहीं मिलेगा। सरकार का मुख्य फोकस इस बात पर है कि बस्तर के सुदूर वनांचलों में रहने वाले आदिवासियों को कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर उनका हक मिले। इसके लिए प्रशासन ने एक बेहद कड़क रणनीति तैयार की है, जिसके तहत हर एक ग्रामीण का व्यक्तिगत डेटा तैयार किया जा रहा है। नक्सलियों का सबसे बड़ा हथियार यह होता था कि वे ग्रामीणों को भड़काते थे कि सरकार तुम्हें नहीं जानती, लेकिन अब इस डिजिटल चक्रव्यूह से नक्सलियों का यह बहाना हमेशा के लिए छिन जाएगा। इस विशेष अभियान के तहत कुल 31 व्यक्तिगत हितग्राही मूलक योजनाएं (Niyad Nellanar Phase 2 Bastar) सीधे ग्रामीणों के घर तक पहुंचाई जाएंगी।

सरकार खुद चलकर आदिवासियों के पास जाएगी और उनके मनरेगा जॉब कार्ड, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और दिव्यांगता पेंशन को मौके पर ही स्वीकृत करेगी। इतना ही नहीं, जिन आदिवासियों ने अपनी पूरी जिंदगी झोपड़ियों और डर के साए में गुजार दी, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान दिए जाएंगे। जल जीवन मिशन के जरिए उनके घरों तक साफ पानी पहुंचाया जाएगा और राशन कार्ड बनाकर उन्हें मुफ्त राशन वितरण योजना से सीधे जोड़ा जाएगा।

हर किसी को मिलेगा सुरक्षा कवच

यह योजना सिर्फ आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बस्तर की आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने का एक मानवीय प्रयास है। बस्तर के अंदरूनी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं का न होना हमेशा से एक अभिशाप रहा है, जिसका फायदा उठाकर माओवादी अपनी पैठ बनाते थे। अब सरकार इस मोर्चे पर सबसे बड़ा प्रहार कर रही है। सुदूर अंचलों के हर व्यक्ति का आयुष्मान कार्ड बनाया जाएगा, जिससे उन्हें गंभीर बीमारियों के मुफ्त इलाज की सुविधा मिलेगी। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत गांवों को अस्वच्छता से मुक्त किया जाएगा

। महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से सक्षम आंगनबाड़ी और पोषण अभियान को गति दी जाएगी, ताकि बस्तर का कोई भी बच्चा कुपोषित न रहे। माताओं और नवजातों की सुरक्षा के लिए जननी सुरक्षा योजना और मिशन इंद्रधनुष टीकाकरण (Niyad Nellanar Phase 2 Bastar) को अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा। इसके साथ ही, महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास की प्रधानमंत्री मातृवंदन योजना और छत्तीसगढ़ सरकार की सबसे लोकप्रिय महतारी वंदन योजना का सीधा लाभ वनांचल की महिलाओं के बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाएगा।

किसानों और युवाओं को मिलेगा संबल

इस आक्रामक योजना का एक और बेहद महत्वपूर्ण पहलू है बस्तर की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नक्सलियों के चंगुल से आजाद कराना। माओवादी हमेशा आदिवासियों को जल, जंगल और जमीन के नाम पर गुमराह करते रहे हैं, लेकिन अब सरकार उन्हें आर्थिक रूप से इतना मजबूत कर देगी कि वे किसी के बहकावे में न आएं। वनांचल के किसानों को मुख्यधारा की कृषि व्यवस्था से जोड़ने के लिए पीएम किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और मृदा स्वास्थ्य कार्ड बांटे जाएंगे।

इसके साथ ही, हर ग्रामीण का प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत बैंक खाता खोला जाएगा, ताकि सरकार से मिलने वाली पाई-पाई सीधे उनके पास पहुंचे और भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश न रहे। शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति लाते हुए समग्र शिक्षा के तहत स्कूली बच्चों को निःशुल्क गणवेश व पाठ्यपुस्तकें (Niyad Nellanar Phase 2 Bastar) बांटी जाएंगी, ताकि बस्तर के बच्चों के हाथों में बंदूक नहीं, बल्कि किताबें हों। युवाओं को हुनरमंद बनाकर रोजगार से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत विशेष प्रशिक्षण शिविर लगाए जाएंगे, जिससे बस्तर का युवा आत्मनिर्मित बन सके।

आदिवासियों को मिलेगी उनकी असली पहचान

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सबसे बड़ी विडंबना यह रही है कि वहां के हजारों आदिवासियों के पास अपनी नागरिकता और वजूद को साबित करने का कोई जरिया ही नहीं था। वे अपने ही देश में बेगाने बनकर रह रहे थे। ‘नियद नेल्लानार 2.0’ इस विडंबना को हमेशा के लिए खत्म करने जा रही है। इस अभियान के तहत सभी पात्र हितग्राहियों के आधार कार्ड (Niyad Nellanar Phase 2 Bastar) युद्ध स्तर पर बनाए जाएंगे। इसके अलावा श्रम कार्ड, वोटर आईडी और सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तिगत वनाधिकार पत्र बांटे जाएंगे, जो आदिवासियों को उनकी जमीन का असली मालिकाना हक दिलाएंगे। प्रशासनिक अमला खुद गांवों में कैंप लगाकर ग्रामीणों के जाति, जन्म, निवास, मृत्यु और ई-डब्ल्यूएस प्रमाण पत्र जारी करेगा। जब हर आदिवासी के हाथ में उसकी पहचान का सरकारी दस्तावेज होगा, तो माओवादियों का वो खोखला डर अपने आप खत्म हो जाएगा जिसके दम पर वे अब तक राज करते आए हैं।

14 सामुदायिक सुविधाओं से ढहेगा माओवाद का किला

व्यक्तिगत लाभ के साथ-साथ सरकार बस्तर के सुदूर अंचलों के इंफ्रास्ट्रक्चर को इस तरह बदलने जा रही है कि वहां माओवादियों के छिपने और अपनी अदालतें लगाने की जगह ही न बचे। गांवों का कायाकल्प करने के लिए 14 सामुदायिक सुविधाएं (Niyad Nellanar Phase 2 Bastar) विकसित की जा रही हैं। जिन गांवों ने कभी बिजली और पक्की सड़कें नहीं देखीं, वहां अब नए आंगनबाड़ी केंद्र, आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं और उचित मूल्य की राशन दुकानें खोली जाएंगी। बस्तर के विकास में सबसे बड़ा रोड़ा कनेक्टिविटी का न होना रहा है, इसलिए सरकार अब सड़क व मोबाइल कनेक्टिविटी को सबसे बड़ी प्राथमिकता दे रही है। सुदूर गांवों में नए मोबाइल टावर खड़े किए जाएंगे, डाकघर खोले जाएंगे और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए वन धन विकास केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही, ग्रामीणों की सहूलियत के लिए सामान्य सेवा केंद्र (CSC), भव्य पंचायत भवन और बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। शिक्षा के स्तर को सर्वोच्च शिखर पर ले जाने के लिए ब्लॉक स्तर पर नए कॉलेजों की स्थापना की जाएगी, जिससे बस्तर के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए अपना घर न छोड़ना पड़े।

मंत्रालय में जुटे आला अफसर, मुख्य सचिव ने दी अंतिम चेतावनी

इस महा-अभियान को जमीन पर उतारने के लिए मंत्रालय में आयोजित बैठक कोई आम प्रशासनिक बैठक नहीं थी। इसमें सरकार के तेवर बेहद सख्त और आक्रामक नजर आए। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, गृह एवं जेल विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक सिंह और आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा सहित राज्य के सभी रसूखदार विभागों के सचिव मौजूद थे। स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव और सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव अविनाश चम्पावत को मुख्य सचिव ने दोटूक शब्दों में कह दिया है कि बजट या समन्वय की कमी का कोई भी बहाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव अमित कटारिया, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद और राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी को भी मैदानी स्तर पर चौबीसों घंटे निगरानी रखने को कहा गया है। मुख्य सचिव विकासशील ने बैठक के अंत में सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ तय समय-सीमा के भीतर इन सभी कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर लागू करने के कड़े निर्देश (Niyad Nellanar Phase 2 Bastar) जारी किए हैं। उन्होंने साफ किया कि अगर किसी भी स्तर पर ढिलाई पाई गई, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तत्काल और सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। सरकार के इस सख्त रुख से साफ है कि अब बस्तर में बदलाव की बयार को कोई रोक नहीं सकता और माओवाद का अंत अब बेहद करीब है।

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