सीजी भास्कर, 23 अप्रैल : छत्तीसगढ़ के रायपुर शहर के बीचों-बीच बना स्काई वॉक अब शहर के विकास का प्रतीक कम और लापरवाही की मिसाल ज्यादा बनता जा रहा है। 77 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से तैयार हो रहा यह प्रोजेक्ट बीते 8 वर्षों में आधा भी पूरा नहीं हो सका है। निर्माण कार्य की मौजूदा स्थिति (Raipur Skywalk Project) को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जगह-जगह सड़े-गले टीन शेड और जंग लगी छड़ों के सहारे ढलाई किए जाने से इसकी गुणवत्ता पर संदेह गहराता जा रहा है।
निर्देशों की अनदेखी, घटिया सामग्री से निर्माण
जानकारी के अनुसार निर्माण से पहले स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि पुरानी और खराब सामग्री को हटाकर नए और मजबूत संसाधनों का उपयोग किया जाए। बावजूद इसके पीएसएए कंट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा कई स्थानों पर छेद वाले टीन शेड और जंग लगी छड़ों का उपयोग कर निर्माण किया जा रहा है। इस तरह का कार्य (Raipur Skywalk Project) को भविष्य में किसी बड़े हादसे की ओर धकेल सकता है, जिससे आम लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती है।
अधिकारियों की गैरमौजूदगी, निगरानी शून्य
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस पूरे निर्माण कार्य के दौरान पीडब्ल्यूडी के जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नजर ही नहीं आ रहे हैं। ना तो वे नियमित निरीक्षण कर रहे हैं और ना ही काम की प्रगति पर कोई स्पष्ट जानकारी सामने आ रही है। जिम्मेदारों की इस लापरवाही के चलते (Raipur Skywalk Project) अब पूरी तरह भगवान भरोसे चलता दिख रहा है।
8 साल में अधूरा, लागत पहुंची 77 करोड़ पार
स्काई वॉक का निर्माण कार्य पिछले 8 वर्षों से जारी है। बीच में पूर्ववर्ती सरकार के दौरान इस प्रोजेक्ट पर रोक लग गई थी, जिससे काम पूरी तरह ठप हो गया था। वर्ष 2023 में नई सरकार बनने के बाद इसे फिर से शुरू किया गया, लेकिन देरी और बदलावों के कारण इसकी लागत बढ़कर 77 करोड़ रुपए से अधिक हो गई। यह देरी (Raipur Skywalk Project) की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है।
गुणवत्ता पर उठे सवाल, रात में भी जारी काम
दरअसल 21 मई 2025 से इस प्रोजेक्ट पर दोबारा काम शुरू किया गया था, जिसे 20 अप्रैल 2026 तक पूरा किया जाना था। इस दौरान ढलाई, टाइल्स, हूड पाइप, सीढ़ियों समेत कई कार्य किए गए, लेकिन गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। बिना निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था के रात में भी काम जारी रहना (Raipur Skywalk Project) की स्थिति को और चिंताजनक बनाता है।
आम जनता पर पड़ रहा असर
इस परियोजना की देरी और अव्यवस्थित कार्यप्रणाली का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। जहां एक ओर लोगों को बेहतर सुविधाओं का इंतजार है, वहीं दूसरी ओर अधूरा और संदिग्ध निर्माण कार्य उनके लिए खतरा बनता जा रहा है।


