सीजी भास्कर, 07 जुलाई : केंद्र सरकार के कर्मचारियों को गलती से हुए अधिक वेतन (Overpayment Recovery) की वसूली से राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ एक्सपेंडिचर (DoE) के साथ हुई बैठक में नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने वर्षों बाद की जाने वाली वेतन रिकवरी को माफ करने की प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग उठाई। बैठक के बाद DoE सचिव ने आश्वासन दिया कि इस विषय पर डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) से चर्चा कर आवश्यक निर्णय लिया जाएगा।
2 जुलाई की बैठक में उठा अहम मुद्दा
NC-JCM के सचिव शिव गोपाल मिश्रा ने बताया कि 2 जुलाई को वित्त मंत्रालय के DoE के साथ हुई बैठक में कर्मचारियों से अधिक या गलत भुगतान (Overpayment Recovery) की रिकवरी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। संगठन ने इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव सौंपते हुए प्रक्रिया को सरल और कर्मचारी हितैषी बनाने की मांग की। इससे पहले यह विषय मई 2026 में आयोजित 49वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में भी कैबिनेट सचिव के समक्ष रखा जा चुका है।
बार-बार ऑडिट से बढ़ रही परेशानी
NC-JCM का कहना है कि कर्मचारियों के सेवा अभिलेखों का समय-समय पर ऑडिट किया जाता है, लेकिन नई ऑडिट टीम पहले से जांचे जा चुके रिकॉर्ड की भी दोबारा समीक्षा करती है। इसके बाद अतिरिक्त अवकाश, वेतन निर्धारण में त्रुटि, पदोन्नति संबंधी गलती या अन्य प्रशासनिक कारणों का हवाला देकर वर्षों बाद कर्मचारियों से राशि की रिकवरी शुरू कर दी जाती है।
प्रशासनिक गलती की सजा कर्मचारियों को क्यों?
संगठन का तर्क है कि अधिकांश मामलों में अधिक भुगतान कर्मचारियों की गलती नहीं, बल्कि विभागीय या प्रशासनिक त्रुटि का परिणाम होता है। कई बार संबंधित अधिकारी का तबादला या सेवानिवृत्ति हो चुकी होती है और कर्मचारी के पास भी पुराने दस्तावेज उपलब्ध नहीं रहते। इसके बावजूद उनके वेतन या सेवानिवृत्ति लाभों से रिकवरी की कार्रवाई शुरू कर दी जाती है, जिससे कर्मचारियों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
रिकवरी माफी में देरी भी बड़ी समस्या
NC-JCM ने बताया कि मौजूदा नियमों के तहत कई मामलों में अधिक भुगतान की रिकवरी माफ की जा सकती है, लेकिन जिम्मेदारी तय करने की लंबी प्रक्रिया के कारण राहत मिलने में काफी समय लग जाता है। इसका सबसे अधिक असर सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके कर्मचारियों पर पड़ता है।
सरकार के सामने रखे गए प्रमुख सुझाव
संगठन ने सरकार के समक्ष कई अहम सुझाव भी रखे हैं। इनमें DoPT के 2 मार्च 2016 के ऑफिस मेमोरेंडम (OM) को सभी मंत्रालयों और विभागों में सख्ती से लागू करना, नियमों का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करना, पांच लाख रुपये तक की अधिक भुगतान राशि की रिकवरी माफ करने का अधिकार विभागाध्यक्ष को देना तथा पहले से ऑडिट और स्वीकृत रिकॉर्ड की दोबारा जांच की व्यवस्था पर पुनर्विचार करना शामिल है। संगठन का मानना है कि इन सुधारों से कर्मचारियों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत मिलेगी और लंबित मामलों का तेजी से निपटारा हो सकेगा।



