सीजी भास्कर 23 अप्रैल
सरगुजा। छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में पेट्रोल-डीजल का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पेट्रोलियम कंपनियों की ओर से सप्लाई बाधित होने के कारण बीपीसीएल के लगभग 95% पेट्रोल पंप बुधवार तक ड्राई हो गए हैं। वहीं इंडियन ऑयल और एचपीसीएल ने भी सप्लाई लगभग रोक दी है, जिससे हालात और बिगड़ गए हैं। बसों और ट्रकों को भी सीमित मात्रा में डीजल दिया जा रहा है। पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग की है।
पखवाड़े भर से चल रहा संकट, अब हुआ गहरा
दरअसल, पिछले करीब एक पखवाड़े से पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कमी बनी हुई थी, लेकिन बीते दो दिनों में यह संकट और गहरा गया है। अंबिकापुर के बनारस चौक स्थित अंबिका पेट्रोल पंप जैसे बड़े और व्यस्त पंप भी इस संकट की चपेट में आ गए हैं।
सप्लाई पर लिमिट, कई पंप हुए ड्राई
सरगुजा संभाग में पेट्रोलियम कंपनियों ने जनवरी और फरवरी की खपत के आधार पर सप्लाई की सीमा तय कर दी है, हालांकि यह आदेश लिखित में नहीं है। बीपीसीएल के करीब 80 पेट्रोल पंपों में से अधिकांश ड्राई हो चुके हैं। वहीं इंडियन ऑयल के लगभग 150 और एचपीसीएल के करीब 120 पंपों पर भी लिमिट लागू होने से कई पंप खाली हो गए हैं और बाकी भी खाली होने की कगार पर हैं।
ऑर्डर पोर्टल लॉक, संकट और बढ़ने की आशंका
स्थिति को और गंभीर बनाते हुए कंपनियों ने पेट्रोल पंपों के ऑर्डर पोर्टल को भी लॉक कर दिया है। ऐसे में आने वाले दो दिनों में ईंधन संकट और गहराने की आशंका जताई जा रही है।
एसोसिएशन ने कलेक्टर से लगाई गुहार
सरगुजा पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर तुरंत हस्तक्षेप करने और पेट्रोल-डीजल की सप्लाई बहाल कराने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि तीनों प्रमुख कंपनियों ने सप्लाई रोक दी है, जिससे स्थिति गंभीर हो गई है।
बढ़ी मांग, लेकिन सीमित वितरण
एसोसिएशन के अध्यक्ष राजकुमार अग्रवाल के अनुसार, कंपनियों ने पुराने महीनों के आंकड़ों के आधार पर लिमिट तय की है, जबकि वर्तमान में शादी और खेती के कारण ईंधन की मांग बढ़ी हुई है। ट्रकों और बसों को 200 लीटर से ज्यादा डीजल देने पर पंप संचालकों को नोटिस भेजा जा रहा है और सप्लाई रोकी जा रही है।
कोयला उत्पादन और परिवहन पर असर
जहां-जहां पेट्रोल-डीजल उपलब्ध है, वहां लंबी कतारें लग रही हैं। ईंधन की कमी का सीधा असर कोयला उत्पादन, परिवहन और खेती पर पड़ रहा है। डीजल की कमी के कारण खदानों में काम प्रभावित हो रहा है, क्योंकि मशीनों में बड़े पैमाने पर डीजल का उपयोग होता है। वहीं ट्रेलर और ट्रक भी सीमित ईंधन के कारण खड़े हो रहे हैं।
कंज्यूमर पंप बंद, बढ़ी परेशानी
पहले खनन कंपनियां और ट्रांसपोर्टर कंज्यूमर पंप से सस्ता डीजल लेते थे, लेकिन अब सरकार द्वारा इसकी कीमत बढ़ाकर 132 रुपए प्रति लीटर करने से ये पंप बंद हो गए हैं। इससे सामान्य पेट्रोल पंपों पर दबाव और बढ़ गया है।
घाटे के चलते कंपनियों ने घटाई सप्लाई
डीलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, पेट्रोलियम कंपनियों को पेट्रोल-डीजल की बिक्री में घाटा हो रहा है। अनुमान के अनुसार, डीजल पर करीब 35 रुपए और पेट्रोल पर 18 से 20 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। इसी कारण कंपनियों ने सप्लाई कम कर दी है और जहां ईंधन उपलब्ध है, वहां भी सीमित मात्रा में ही वितरण किया जा रहा है।


