सीजी भास्कर, 04 जुलाई : एक तरफ सरकार ‘पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया’ और ‘नौनिहालों (Pratappur Broken Bridge Controversy) के सुरक्षित भविष्य’ के बड़े-बड़े दावे करते नहीं थकती, वहीं दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से आई एक रूह कंपा देने वाली जमीनी हकीकत ने इन दावों के परखच्चे उड़ा कर रख दिए हैं। जिले के प्रतापपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले खड़गवा गुडरूडाण गांव में कड़कड़ाती बरसात की शुरुआत होते ही मासूम स्कूली बच्चों और ग्रामीणों की जिंदगी दांव पर लग गई है। क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण पुलिया के पूरी तरह क्षतिग्रस्त होकर टूट जाने के कारण, मासूम बच्चे हर दिन अपनी जान हथेली पर रखकर, उफनती नदी के तेज बहाव को पार कर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं।
कंधे पर बस्ता, गोद में मासूम
इस पूरे प्रशासनिक अंधेरे को उजागर करता हुआ एक बेहद डरावना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे बेबस और लाचार माता-पिटा अपने छोटे-छोटे मासूम बच्चों को गोद में उठाकर और कंधों पर बैठाकर घुटनों से ऊपर तक बह रहे तेज और उफनते नदी के पानी को पार करा रहे हैं। पानी का बहाव इतना तेज है कि अगर एक पल के लिए भी पैर फिसला, तो मासूम का बचना नामुमकिन है। यह खौफनाक सफर केवल स्कूल जाने के लिए नहीं, बल्कि ग्रामीणों को राशन, बाजार, अस्पताल और अन्य आपातकालीन सुविधाओं के लिए भी रोज तय करना पड़ रहा है। पुलिया टूटने से पूरा गांव टापू में तब्दील हो चुका है।
सालों से सिर्फ आश्वासन का झुनझुना
ग्रामीणों का आक्रोश इस बात को लेकर सबसे ज्यादा है कि यह समस्या किसी एक साल या अचानक आई विपदा की नहीं है। पिछले कई वर्षों से यह पुलिया जर्जर थी और आखिरकार ढह गई। ग्रामीणों ने दबी जुबान में और खुलकर भी कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों, नेताओं और जिला प्रशासन के आला अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटे, गुहार लगाई और शिकायती पत्र सौंपे। लेकिन हर बार उन्हें केवल ‘जल्द निर्माण’ का खोखला और झूठा आश्वासन थमा दिया गया। नतीजा यह है कि हर साल मानसून आते ही इस इलाके में आदिम युग जैसे हालात बन जाते हैं।
ग्रामीणों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
तेज बहाव के बीच मासूमों को इस तरह नदी पार कराते देख पूरे इलाके के अभिभावक बेहद डरे और सहमे हुए हैं। ग्रामीणों का साफ कहना है कि प्रशासन शायद किसी बड़े और दर्दनाक हादसे का इंतजार कर रहा है, तभी उसकी नींद खुलेगी। उफनती नदी का यह खौफनाक सफर कभी भी मासूमों की जिंदगी निगल सकता है। आक्रोशित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए मांग की है कि यहां तत्काल प्रभाव से आवागमन के लिए कोई मजबूत वैकल्पिक व्यवस्था (जैसे अस्थायी रपटा या नाव) की जाए और युद्ध स्तर पर नई पुलिया का निर्माण कार्य शुरू कराया जाए, वरना ग्रामीण कड़ा रुख अपनाते हुए चक्काजाम और उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे।



