सीजी भास्कर, 26 अगस्त : राजधानी के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट (Raipur Airport Privatization) को आने वाले समय में निजी ऑपरेटर के हाथों सौंपने की तैयारी है। केंद्र सरकार ने देश के 11 एयरपोर्ट को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल पर 50 साल की कंसेशन अवधि के लिए देने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव को सार्वजनिक-निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति (PPPAC) से सैद्धांतिक मंजूरी भी मिल चुकी है।
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11 एयरपोर्ट को पांच समूहों में बांटने की तैयारी
प्रस्ताव के अनुसार 11 एयरपोर्ट को पांच समूहों में बांटा जाएगा। प्रत्येक समूह में एक बड़े एयरपोर्ट के साथ छोटे या मध्यम एयरपोर्ट को जोड़ा जाएगा। समूह में शामिल सभी एयरपोर्ट के संचालन और विकास की जिम्मेदारी एक ही निजी कंपनी को देने की योजना है।
सरकार का मानना है कि इससे एयरपोर्ट सेक्टर में निजी निवेश बढ़ेगा। साथ ही यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं और एयरपोर्ट के संचालन में भी सुधार हो सकता है। रायपुर एयरपोर्ट (Raipur Airport Privatization) को भी इसी योजना के तहत निजी भागीदारी के लिए चुना गया है।
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रायपुर और औरंगाबाद एक ही समूह में
प्रस्तावित योजना में रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट को औरंगाबाद एयरपोर्ट के साथ एक समूह में रखा गया है। इसके अलावा अमृतसर-कांगड़ा गग्गल, वाराणसी-गया-कुशीनगर, भुवनेश्वर-हुबली और तिरुचिरापल्ली-तिरुपति एयरपोर्ट को भी अलग-अलग समूहों में शामिल किया गया है।
एक समूह की जिम्मेदारी एक निजी ऑपरेटर को मिलने से एयरपोर्ट के संचालन, रखरखाव और भविष्य के विस्तार का काम एक ही कंपनी के अधीन होगा।
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11 एयरपोर्ट पर 8,622 करोड़ के निवेश का अनुमान
सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक 11 एयरपोर्ट के संचालन और विकास के लिए निजी कंपनियों की ओर से करीब 8,622 करोड़ रुपए निवेश किए जाने का अनुमान है। रायपुर-औरंगाबाद समूह में भी निजी निवेश के जरिए एयरपोर्ट की सुविधाओं और बुनियादी ढांचे को विकसित करने की योजना है।
इसके साथ ही सरकार ने एक बोलीदाता को दिए जाने वाले समूहों की संख्या सीमित रखने का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य किसी एक कंपनी के पास बहुत अधिक एयरपोर्ट जाने और कर्ज से जुड़े जोखिम को कम करना है।
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AAI कर्मचारियों की नौकरी को लेकर भी प्रावधान
निजी ऑपरेटर को एयरपोर्ट का संचालन सौंपे जाने के बाद एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के मौजूदा कर्मचारियों के लिए भी व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। निजी कंपनी को शुरुआती एक साल तक AAI के साथ मिलकर एयरपोर्ट का संचालन करना होगा।
इसके बाद कम से कम तीन साल तक AAI के 60 प्रतिशत कर्मचारियों को नौकरी में बनाए रखने का प्रस्ताव है। इससे निजीकरण की प्रक्रिया के दौरान मौजूदा कर्मचारियों के हितों को सुरक्षित रखने की कोशिश की गई है।
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यात्री संख्या और कमाई की क्षमता के आधार पर चयन
एयरपोर्ट के चयन के लिए AAI ने चरणबद्ध प्रक्रिया अपनाई। पहले 12 बड़े एयरपोर्ट का यात्री संख्या, उपलब्ध जमीन, कमाई की संभावना और आर्थिक स्थिति जैसे मानकों के आधार पर मूल्यांकन किया गया। इसके बाद 136 छोटे एयरपोर्ट का आकलन किया गया कि उन्हें बड़े एयरपोर्ट के साथ किस तरह जोड़ा जा सकता है।
इसी प्रक्रिया के आधार पर PPP मॉडल के मौजूदा चरण के लिए 11 एयरपोर्ट का चयन किया गया है। रायपुर एयरपोर्ट (Raipur Airport Privatization) को औरंगाबाद के साथ जोड़ने के फैसले के बाद अब प्रस्ताव के अगले चरण में निजी कंपनियों की भागीदारी और बोली प्रक्रिया पर नजर रहेगी।




