सीजी भास्कर, 27 जून : देशभर में कफ सिरप के दुरुपयोग और बच्चों की मौत के मामलों के बाद केंद्र सरकार ने बिना डॉक्टर की पर्ची कफ सिरप बेचने पर सख्ती लागू की है। बिना पर्ची कफ सिरप बिक्री (Prescription Cough Syrup Rule) पर रोक के बावजूद राजधानी रायपुर में कई मेडिकल स्टोरों पर नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। औषधि नियम, 1945 में संशोधन के बाद अब कफ सिरप केवल डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर ही बेची जा सकती है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका पालन होता नजर नहीं आ रहा।
बिना प्रिस्क्रिप्शन मेडिकल स्टोरों से मिल रही कफ सिरप
शहर के विभिन्न मेडिकल स्टोरों पर पड़ताल के दौरान सामने आया कि बच्चों के लिए कफ सिरप मांगने पर अधिकांश दुकानदारों ने डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन नहीं मांगा। उन्होंने केवल बच्चे की उम्र पूछकर अलग-अलग कंपनियों की कफ सिरप उपलब्ध करा दी। कई दुकानदारों ने दवा की खुराक भी स्वयं तय कर दी। इतना ही नहीं, किसी ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि बच्चे को कब से खांसी है, पहले कोई दवा चल रही है या किसी दवा से एलर्जी तो नहीं है।
निगरानी व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
जानकारों के अनुसार केंद्र सरकार के आदेश के बावजूद नियमों के पालन की प्रभावी निगरानी नहीं हो रही है। ड्रग कंट्रोल विभाग मुख्य रूप से शिकायत मिलने पर ही जांच करता है, जबकि नियमित औचक निरीक्षण नहीं होने से मेडिकल स्टोरों पर नियमों का उल्लंघन जारी है। ड्रग अधिकारी बेनी राम साहू ने कहा कि बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन कफ सिरप देना प्रतिबंधित है और नियमों का उल्लंघन करने वाले मेडिकल स्टोरों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों ने अभिभावकों को किया सतर्क
बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में खांसी के कई कारण हो सकते हैं, इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह कफ सिरप देना जोखिम भरा हो सकता है। बच्चे की उम्र, वजन और बीमारी की स्थिति के अनुसार ही दवा तय की जानी चाहिए। गलत दवा या गलत खुराक से अत्यधिक नींद, सुस्ती, एलर्जी और अन्य दुष्प्रभाव हो सकते हैं। विशेषज्ञों ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों को किसी भी प्रकार की दवा डॉक्टर की सलाह के बिना न दें।



