पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में लंबे समय से रुकी PRSU Faculty Recruitment प्रक्रिया आखिरकार आगे बढ़ गई है। इस बार विश्वविद्यालय ने 18 विषयों में कुल 28 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया है, जिससे उन विभागों में राहत की उम्मीद बढ़ गई है जहाँ कई वर्षों से स्थायी शिक्षकों की कमी पढ़ाई और शोध दोनों पर असर डाल रही थी।
आवेदन भेजने का तरीका और समय सीमा
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आवेदन केवल Offline Submission के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। ई-मेल से भेजे गए आवेदन को सीधे अमान्य घोषित किया गया है। निर्धारित अंतिम तिथि 15 दिसंबर शाम 5:30 बजे तक ही आवेदन मान्य होंगे, और इसके बाद प्राप्त किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा।
PRSU Faculty Recruitment: किन विषयों में होने जा रही नियुक्तियाँ
भर्ती की प्रक्रिया जिन विषयों के लिए शुरू की गई है, उनमें कंप्यूटर साइंस, फिजिक्स, केमिस्ट्री, कॉमर्स, फार्मेसी, हिंदी, अंग्रेजी, मैथ्स, बॉटनी, जूलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी, इतिहास, भूगोल, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, लोक प्रशासन और शिक्षा शास्त्र शामिल हैं। कई विभागों में वर्षों से स्थायी फैकल्टी न होने के कारण शिक्षण का बड़ा हिस्सा Guest Faculty Load पर ही टिका हुआ था।
नई नियुक्तियों से बढ़ेंगी शैक्षणिक गतिविधियाँ
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित फैकल्टी की उपलब्धता से कक्षाएं, रिसर्च सुपरविजन और Lab-Based Teaching जैसी गतिविधियाँ अधिक सुव्यवस्थित होंगी। इसके साथ ही विश्वविद्यालय की नैक मूल्यांकन प्रक्रिया में भी सुधार की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि स्थायी संकाय किसी भी शैक्षणिक संस्था की गुणवत्ता का मुख्य आधार माने जाते हैं।
PRSU Faculty Recruitment: पात्रता, आयु सीमा और आवश्यक योग्यता
भर्ती के लिए अधिकतम आयु सीमा 65 वर्ष तय की गई है। पात्र अभ्यर्थियों के लिए स्नातकोत्तर में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक अनिवार्य हैं। इसके अलावा विषय विशेषज्ञता, शोधपत्र प्रकाशन, रिसर्च प्रोजेक्ट्स और शिक्षण अनुभव को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। विश्वविद्यालय का कहना है कि PRSU Faculty Recruitment में योग्य अभ्यर्थियों को ही मौका दिया जाएगा।
निर्धारित प्रारूप में दस्तावेज जमा करना अनिवार्य
आवेदन पत्र निर्धारित प्रारूप में भरकर आवश्यक दस्तावेजों के साथ जमा करना होगा। कई विभागों ने उम्मीद जताई है कि नई नियुक्तियाँ कक्षाओं की निरंतरता, शोध प्रगति और इंटर-डिसिप्लिनरी गतिविधियों की गुणवत्ता को तेज़ी से सुधारेंगी।




