सीजी भास्कर, 1 अक्टूबर : मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच जारी बहस के बीच आयोग ने अपने फैसलों और प्रक्रिया पर सफाई दी है। आयोग ने 26 सितंबर को कहा था कि देशभर में SIR लागू करने से जुड़े आदेश तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से मंजूर किए गए थे। हालांकि, SIR पर चुनाव आयोग की सफाई (SIR Election Commission) के बाद भी Form 6 से जुड़े प्रावधानों को लेकर विवाद सामने आया और 30 सितंबर को आयोग ने संबंधित घोषणा-पत्र को वापस लेने का फैसला किया।
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SIR पर आयोग का पक्ष
चुनाव आयोग के मुताबिक 24 जून 2025 को देशभर में SIR कराने का आदेश जारी किया गया था। आयोग ने कहा कि इस आदेश को तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति से मंजूरी मिली थी। इसके बाद अलग-अलग चरणों में SIR का कार्यक्रम भी सर्वसम्मति से मंजूर किया गया। आयोग ने यह भी कहा कि 27 मई 2026 के अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने देशव्यापी SIR के आदेश को बरकरार रखा था।
आयोग का कहना है कि SIR प्रक्रिया (SIR Election Commission) का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और मृत, डुप्लीकेट, स्थानांतरित अथवा अपात्र नामों की पहचान करना है। साथ ही पात्र मतदाताओं को सूची में बनाए रखना भी प्रक्रिया का हिस्सा है।
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Form 6 पर क्या हुआ
नए मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए Form 6 की सुविधा उपलब्ध है। चुनाव आयोग के आधिकारिक पोर्टल पर भी 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पात्र नागरिकों के लिए Form 6 के जरिए पंजीकरण की सुविधा दी गई है।
हालांकि, SIR के दौरान Form 6 से जुड़े अतिरिक्त घोषणा-पत्र को लेकर विवाद हुआ। 26 सितंबर को आयोग ने कहा था कि इस घोषणा को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का समर्थन प्राप्त है। इसके बाद 30 सितंबर को सामने आई जानकारी के अनुसार आयोग ने Form 6 से जुड़े इस अतिरिक्त घोषणा-पत्र को वापस लेने का फैसला किया। Form 6 विवाद (SIR Election Commission) इसलिए SIR से जुड़े मौजूदा घटनाक्रम का अहम हिस्सा बन गया है।
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BLO की भूमिका क्या है
SIR प्रक्रिया में बूथ लेवल अधिकारियों यानी BLO की भूमिका महत्वपूर्ण है। आयोग ने बताया है कि छूटे हुए मतदाताओं तक पहुंचकर उनके फॉर्म लेने और नाम शामिल कराने की प्रक्रिया जारी है। गोवा के मामले में आयोग ने कहा कि 97 छूटे मतदाताओं में से 81 ने Form 6 भर दिया था।
आयोग के मुताबिक मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने का काम संबंधित ERO और AERO स्तर पर किया जाता है। यह प्रक्रिया सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा व्यक्तिगत रूप से संचालित नहीं की जाती।
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बेला एस्टेट पर विवाद
दिल्ली के बेला एस्टेट में मतदाताओं के नाम हटने को लेकर भी विवाद सामने आया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दावा किया कि वहां 728 मतदाताओं में से 727 नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं हैं। चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि SIR प्रक्रिया के दौरान संबंधित मतदाताओं की स्थिति का सत्यापन किया जा रहा है और नाम शामिल कराने के लिए निर्धारित प्रक्रिया उपलब्ध है।
आयोग के मुताबिक, SIR के दौरान छूटे लोगों और नए मतदाताओं के लिए लगातार अपडेट की प्रक्रिया जारी रहती है। बेला एस्टेट मतदाता विवाद (SIR Election Commission) इसी प्रक्रिया और मतदाता सूची में नामों को लेकर उठे सवालों के बीच चर्चा में है।
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20 राज्यों में पूरा SIR
चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को कहा था कि बिहार और पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में SIR पूरा हो चुका है। आयोग के अनुसार, जिन लोगों के नाम छूट गए हैं, वे लगातार चलने वाली मतदाता सूची अपडेट प्रक्रिया के तहत ERO के पास नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। CEOs को ऐसे मतदाताओं के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में SIR पर EC का रुख (SIR Election Commission) यह है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया वैधानिक व्यवस्था के तहत चल रही है, जबकि विपक्ष और प्रभावित मतदाताओं की ओर से प्रक्रिया में नाम हटने और सत्यापन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। दोनों पक्षों के दावों के बीच आयोग के ताजा आदेश और अंतिम मतदाता सूची आगे की स्थिति स्पष्ट करेंगे।



