सीजी भास्कर, 30 सितम्बर। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन को अपना दोस्त बताते हुए ईरान और उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रमों को लेकर अमेरिका की अलग-अलग नीतियों का बचाव किया है। ट्रंप ने कहा कि किम के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध भी उत्तर कोरिया के प्रति उनके रुख की एक वजह हैं। उन्होंने उत्तर कोरिया की परमाणु क्षमता के लिए पिछली अमेरिकी सरकारों को भी जिम्मेदार ठहराया। (Trump Kim Jong Un Nuclear Policy)
किम जोंग उन को बताया अपना दोस्त : Trump Kim Jong Un Nuclear Policy
29 सितंबर को व्हाइट हाउस में एक बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप से पूछा गया कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने पर जोर देता है, जबकि उत्तर कोरिया पहले से परमाणु हथियार रखता है। इस पर ट्रंप ने किम जोंग उन के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का हवाला दिया।
ट्रंप ने कहा कि किम उनके दोस्त हैं और दोनों एक-दूसरे को पसंद करते हैं। उन्होंने कहा कि किम के साथ उनके संबंधों को लेकर उन्हें आलोचना का सामना भी करना पड़ता है।
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उत्तर कोरिया की परमाणु क्षमता पर पिछली सरकारों को ठहराया जिम्मेदार
ट्रंप ने कहा कि उत्तर कोरिया के पास बड़ी परमाणु क्षमता है, हालांकि वह अमेरिका की क्षमता के बराबर नहीं है। उन्होंने दावा किया कि पिछली अमेरिकी सरकारों ने उत्तर कोरिया को उसके परमाणु हथियार कार्यक्रम को विकसित करने से रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए।
उत्तर कोरिया ने कई दशकों में अपना परमाणु हथियार कार्यक्रम विकसित किया है और कई परमाणु परीक्षण किए हैं। इसके चलते वह परमाणु हथियार रखने वाले देशों में शामिल हो गया है।
किम से पहले भी कर चुके हैं मुलाकात : Trump Kim Jong Un Nuclear Policy
ट्रंप और किम जोंग उन के बीच उनके पहले कार्यकाल के दौरान कई उच्चस्तरीय मुलाकातें हुई थीं। दोनों नेताओं ने 2018 में सिंगापुर और 2019 में हनोई में शिखर बैठक की थी। ट्रंप लंबे समय से किम के साथ सीधे संवाद को उत्तर कोरिया के साथ तनाव कम करने का एक माध्यम बताते रहे हैं।
ट्रंप ने हाल के बयानों में भी किम से दोबारा मुलाकात की इच्छा जताई है और उत्तर कोरिया की परमाणु क्षमता को स्वीकार किया है।
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ईरान को लेकर अमेरिका का रुख अलग
ईरान के मामले में ट्रंप प्रशासन का रुख काफी अलग रहा है। अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए आर्थिक प्रतिबंधों और सैन्य दबाव जैसी रणनीतियों का इस्तेमाल करता रहा है।
अमेरिका का तर्क है कि ईरान के पास परमाणु हथियार होने से क्षेत्रीय सुरक्षा प्रभावित हो सकती है और परमाणु हथियारों की होड़ बढ़ सकती है। दूसरी ओर, ईरान लगातार परमाणु हथियार विकसित करने के आरोपों से इनकार करता रहा है और अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए बताता है।
ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव में परमाणु कार्यक्रम एक प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर किए गए हमलों के बाद यह विवाद और बढ़ा, जबकि इसके समानांतर दोनों पक्षों के बीच बातचीत और समझौते की कोशिशें भी जारी रही हैं।
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