सीजी भास्कर, 01 जून। भारतीय संगीत जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपनी जादुई तानों से पांच दशकों से अधिक समय तक श्रोताओं के दिलों पर राज करने वाली दिग्गज पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का रविवार शाम को मुंबई में 89 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। (Suman Kalyanpur passes away)

रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी मृत्यु का कारण उम्र से जुड़ी शारीरिक दिक्कतें और बीमारियां बताई जा रही हैं. उन्होंने रात करीब 8 बजे अपनी अंतिम सांस ली और बेहद खामोशी से इस दुनिया को अलविदा कह दिया. (आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे) सुरों की दुनिया में उनके अद्वितीय और ऐतिहासिक योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें साल 2023 में देश के प्रतिष्ठित पद्मभूषण सम्मान से भी नवाजा था।
Suman Kalyanpur passes away : अंतिम पलों में खुद के सुरों का सहारा
उनकी बेहद करीबी सहेली मंगला खाडिलकर ने उनके अंतिम समय से जुड़ा एक बेहद भावुक कर देने वाला संस्मरण साझा किया है. उन्होंने बताया कि सुमन जी पिछले कुछ दिनों से बिस्तर पर रहते हुए अपने ही गाए हुए पुराने गीतों को सुन रही थीं. मानो वे अपने ही सुरों की उंगली थामकर इस नश्वर संसार से विदा होने की तैयारी कर रही थीं।
उनका अंतिम संस्कार सोमवार सुबह करीब 11:30 से 12:00 बजे के बीच मुंबई के स्थानीय श्मशान घाट पर किया जाएगा। वे अपने पीछे अपनी बेटी चारू और करोड़ों प्रशंसकों का रोता-बिलखता परिवार छोड़ गई हैं।
जब लता-रफी विवाद के बीच ‘अनिवार्यता’ बनीं सुमन
सुमन कल्याणपुर की आवाज में कुदरती तौर पर स्वर कोकिला लता मंगेशकर जैसी ही मिठास, बारीकी और सुरों पर मजबूत पकड़ थी. कई बार तो बड़े-बड़े संगीत पारखी भी दोनों की आवाज के बीच अंतर नहीं कर पाते थे और धोखा खा जाते थे. यही खूबी उनके करियर का एक ऐतिहासिक टर्निंग पॉइंट साबित हुई।
1960 के दशक में जब रॉयल्टी के मुद्दे को लेकर लता मंगेशकर और महान गायक मोहम्मद रफी के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया और दोनों ने साथ गाने से इनकार कर दिया, तब फिल्म इंडस्ट्री के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया था. उस दौर में सुमन कल्याणपुर दिग्गज संगीतकारों की पहली पसंद बनकर उभरीं. उन्होंने रफी साहब के साथ सुर से सुर मिलाकर एक से बढ़कर एक ब्लॉकबस्टर युगल गीत गाए, जो आज भी अमर हैं।
रेडियो सीलोन का वह खूबसूरत भ्रम : Suman Kalyanpur passes away
एक पुराने इंटरव्यू में सुमन जी ने इस आवाज की समानता और अपनी शुरुआती उलझनों पर खुलकर बात की थी. उन्होंने कहा था कि वे कॉलेज के दिनों से ही लता जी से बेहद प्रभावित थीं और उनके गाने सुना करती थीं. उनकी आवाज प्राकृतिक रूप से पतली और नाजुक थी।
शुरुआती दौर में ‘रेडियो सीलोन‘ पर उनके गानों को अक्सर बिना नाम लिए ही प्रसारित कर दिया जाता था, जिससे आम जनता और संगीत प्रेमियों के बीच यह भ्रम और गहरा हो जाता था कि यह लता जी की ही आवाज है. यहाँ तक कि शुरुआती दौर में उनके कई म्यूजिक रिकॉर्ड्स पर उनका नाम भी गलत छप जाता था।
ढाका से मुंबई तक का सफरनामा
28 जनवरी 1937 को ढाका (वर्तमान बांग्लादेश) में जन्मीं सुमन के बचपन का नाम सुमन हेम्मडी था. उनके पिता शंकर राव हेम्मडी मूल रूप से कर्नाटक के मैंगलोर के एक सारस्वत ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखते थे. साल 1958 में रामानंद कल्याणपुर के साथ विवाह के बंधन में बंधने के बाद वे सुमन कल्याणपुर के नाम से जानी गईं।
उन्होंने अपने करियर का पहला गाना साल 1953 में एक मराठी फिल्म के लिए रिकॉर्ड किया था. इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और फिल्मफेयर की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने 11 अलग-अलग भाषाओं में 3000 से ज्यादा फिल्मी और गैर-फिल्मी गानों को अपनी सुरीली आवाज से सजाया।
Suman Kalyanpur passes away : विरासत में छोड़ गईं सदाबहार नगमे
सुमन कल्याणपुर बॉलीवुड को गानों का एक ऐसा खजाना सौंप गई हैं जो हमेशा अमर रहेगा. उनके गाए मशहूर गीतों में फिल्म ब्रह्मचारी का ‘आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे‘ और फिल्म जब जब फूल खिले का ‘ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे‘ आज भी लोगों की जुबान पर है. इसके अलावा उन्होंने फिल्म राजकुमार में ‘तुमने पुकारा और हम चले आए‘, फिल्म बात एक रात की में ‘न तुम हमें जानो, न हम तुम्हें जानें‘, और फिल्म मिर्ज़ा ग़ालिब में शास्त्रीय पुट वाला ‘दिल-ए-नादां तुझे हुआ क्या है’ जैसे कालजयी गीत गाए. उनके अन्य सुपरहिट गानों में फिल्म नूर महल का ‘मेरे महबूब न जा, आज की रात न जा‘, फिल्म फर्ज का ‘तुमसे ओ हसीना कभी मोहब्बत न मैंने करनी थी’, फिल्म रेशम की डोरी का रक्षाबंधन स्पेशल गीत ‘बहना ने भाई की कलाई पे प्यार बांधा है’, फिल्म साथी का ‘मेरा प्यार भी तू है‘ और फिल्म सरस्वती चंद्र का दार्शनिक गीत ‘छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए‘ शामिल हैं, जो संगीत के इतिहास में हमेशा उनका नाम जिंदा रखेंगे।




