सीजी भास्कर, 16 जून : बस्तर में शांति, सामाजिक समरसता और पुनर्वास की दिशा में एक प्रेरणादायक तस्वीर उस समय देखने को मिली जब जगदलपुर के टाउन हॉल में आयोजित मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना (Surrendered Naxal Couples Marriage) के अंतर्गत सामूहिक विवाह समारोह में 17 जोड़े वैवाहिक बंधन में बंधे। यह आयोजन केवल विवाह समारोह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक बदलाव, पुनर्वास और मुख्यधारा से जुड़ने की सफल पहल का प्रतीक बनकर सामने आया।
वैदिक मंत्रोच्चार, पारंपरिक रीति-रिवाजों और उत्साहपूर्ण वातावरण के बीच संपन्न हुए इस समारोह की सबसे विशेष बात दो पूर्व नक्सली जोड़ों की सहभागिता रही। आत्मसमर्पण के बाद इन जोड़ों ने समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर गृहस्थ जीवन की नई शुरुआत की। यह दृश्य पुनर्वास नीति की सफलता और बस्तर में बदलते सामाजिक परिवेश का सशक्त संदेश देता नजर आया।
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा साबित हो रही है। योजना के माध्यम से बेटियों के विवाह में आने वाले आर्थिक बोझ को कम करने के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन की दिशा में सकारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं। सामूहिक विवाह कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि शासन की योजनाएं जरूरतमंद परिवारों तक पहुंच रही हैं और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।
कार्यक्रम में नवविवाहित जोड़ों को सुखद एवं सफल वैवाहिक जीवन के लिए शुभकामनाएं और आशीर्वाद दिए गए। जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक गरिमामय बना दिया। समारोह में उपस्थित लोगों ने नवदंपत्तियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए समाज में सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने का संदेश दिया।
बस्तर लंबे समय तक नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचाना जाता रहा है, लेकिन अब आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं के पुनर्वास और समाज से जुड़ाव की ऐसी कहानियां क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव के संकेत दे रही हैं। दो पूर्व नक्सली जोड़ों का विवाह केवल व्यक्तिगत जीवन की नई शुरुआत नहीं बल्कि हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास और सामाजिक सहभागिता की दिशा में बढ़ते कदमों का प्रतीक भी माना जा रहा है।
इस आयोजन ने यह साबित किया कि उचित अवसर, सामाजिक स्वीकार्यता और पुनर्वास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से लोगों के जीवन में सार्थक परिवर्तन लाया जा सकता है। सामूहिक विवाह समारोह बस्तर में शांति, विश्वास और सामाजिक एकता के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।





