सीजी भास्कर 6 फ़रवरी रायपुर। Temple Dress Code Rules को लेकर छत्तीसगढ़ के मंदिरों में पहली बार सख्त दिशा-निर्देश लागू होते दिख रहे हैं। इंस्टाग्राम रील्स और सोशल मीडिया पर दिखावे की होड़ ने धार्मिक स्थलों की शांति और गरिमा को प्रभावित किया है। हालात ऐसे बने कि देवालय प्रबंधन को लाउडस्पीकर के जरिए श्रद्धालुओं से शालीनता बनाए रखने की अपील करनी पड़ रही है।
मर्यादित वस्त्रों में ही प्रवेश का आग्रह
राजधानी रायपुर के प्रमुख मंदिरों में मुख्यद्वार के बाहर सूचना चस्पा कर दी गई है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि भक्त (Temple Dress Code) का पालन करते हुए ही परिसर में प्रवेश करें। कमर-कट, भड़काऊ या अनुचित वस्त्रों में प्रवेश से बचने की अपील की गई है, ताकि पूजा-अर्चना का माहौल बाधित न हो।
फोटो और वीडियो पर सख्ती
धार्मिक स्थलों में फोटो खींचने और वीडियो बनाने पर भी रोक लगाई जा रही है। कई मंदिरों में यह शिकायत सामने आई कि पूजा के दौरान रील्स और शूटिंग के कारण अव्यवस्था फैलती है। इसी को देखते हुए प्रबंधन ने (No Photography in Temple) जैसे नियम लागू करने शुरू कर दिए हैं।
ऐतिहासिक स्थलों पर विशेष प्रतिबंध
धार्मिक-ऐतिहासिक महत्व वाले मंदिरों में यह सख्ती और भी ज्यादा है। प्राचीन दीवारों, शिल्प और शांत वातावरण के बीच वेडिंग शूट और सोशल मीडिया कंटेंट बनने से पूजा बाधित हो रही थी। हालात बिगड़ने पर मंदिर समितियों ने (Temple Videography Ban) लागू कर दिया।
लाउडस्पीकर से हो रहा निवेदन
महादेवघाट स्थित हाटकेश्वरनाथ मंदिर के पुजारी पं. सुरेशगिरी गोस्वामी के अनुसार, लाउडस्पीकर के माध्यम से श्रद्धालुओं से शालीन वस्त्र पहनने का अनुरोध किया जा रहा है। यह व्यवस्था पिछले कुछ समय से लागू की गई है, ताकि भक्तिभाव और अनुशासन दोनों बने रहें।
आस्था बनाम दिखावा
मंदिर प्रबंधन का मानना है कि यह कदम किसी पर रोक लगाने के लिए नहीं, बल्कि आस्था की मर्यादा बनाए रखने के लिए जरूरी हो गया है। नियमों का उद्देश्य भक्तों को रोकना नहीं, बल्कि देवालय की पवित्रता और परंपरा को सुरक्षित रखना है।




