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Home » कोविड काल से ठप यूनिफॉर्म फंड: DAV स्कूल में RTE के तहत बच्चों के करोड़ों रुपये अटके, जवाबदेही पर सवाल!

कोविड काल से ठप यूनिफॉर्म फंड: DAV स्कूल में RTE के तहत बच्चों के करोड़ों रुपये अटके, जवाबदेही पर सवाल!

By Newsdesk Admin
06/06/2025
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सीजी भास्कर 6 जून रायपुर:बच्चों को अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शिक्षा के अधिकार योजना के तहत निशुल्क शिक्षा, गणवेश एवं पुस्तकों की उपलब्धता करवाए जाने के सत नियम बनाए गए हैं, लेकिन इन नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आरटीई के तहत बच्चों को मिलने वाली ड्रेस का पैसा ही नहीं दिया जा रहा है। आदिवासी क्षेत्र में संचालित डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल में प्रबंधन इसमें खेल कर रहा है।

डीएवी के कुछ स्कूल में कोविड के समय से यानी पिछले 6 सालों से बच्चों को यूनिफॉर्म के लिए कोई भी पैसा नहीं दिया गया।गणवेश और पुस्तकों के मसले को लेकर उच्च न्यायालय द्वारा भी यह सत आदेश पारित किया गया है कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत भर्ती प्रवेश लिए विद्यार्थियों को प्राइवेट स्कूलों द्वारा भी गणवेश एवं पुस्तकें उपलब्ध करानी हैं, लेकिन स्कूल मनमानी कर रहे हैं। अब जब बात स्कूल प्रबंधन तक पहुंची है तो उनका कहना है कि पैसे स्कूल अकाउंट में ही जमा है बच्चों को जल्द ही दे दिए जाएंगे। लेकिन इतने सालों का देखे तो पैसा करोड़ों में जाता है। यानी आरटीई के पैसे से पैसा बनाने का काम किया जा रहा है। वहीं, जानकारों का यह भी कहना है कि पैसे का का उपयोग कर लिया गया है।

बच्चे जो 6वीं में थे, वो अब 9वीं-10वीं मेंजानकारी के अनुसार, कोविड के समय से ही डीएवी स्कूल में कोई भी ड्रेस के लिए पैसे नहीं दिए गए हैं, जिसके कारण अब उन बच्चों को भी खोजना मुश्किल है। कई बच्चे जो उस समय 6वीं में थे अभी 9वीं-10वीं में पढ़ाई कर रहे हैं। कई बच्चे ही नहीं मिल रहे हैं। जिन बच्चों ने स्कूल छोड़् दिया है उन्हें खोजना तो मुश्किल लग रहा है। स्कूल से मिली जानकारी के अनुसार, पहली से 8वीं तक के बच्चों को ड्रेस के लिए पैसे दिए जाते हैं। बच्चों ने भी बताया कि हमें कोई भी पैसे नहीं दिए गए हैं।मॉडल स्कूलों के संचालन के लिए दिया डीएवी प्रबंधन को: सीबीएसई पाठ्यक्रम पर आधारित मॉडल स्कूलों का संचालन पूर्व भाजपा सरकार में किया गया था। सरकार की मंशा थी कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले स्कूली विद्यार्थियों को आज की प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तैयार किया जाए।

मॉडल स्कूलों का संचालन करने के दौरान ही इन स्कूलों को डीएवी प्रबंधन के सुपुर्द कर दिया गया था। डीएवी प्रबंधन द्वारा सारी व्यवस्था सुनिश्चित की जा जाती है। अनुबंध के अनुरूप राज्य सरकार की ओर से भी आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।पैरेंट्स को बताते नहीं हैजानकारी के अनुसार, डीएवी स्कूल में आरटीई के तहत बच्चों को मिलने वाले सुविधाओं के बारे में पैरेट्स और बच्चों को नहीं बताया जाता है। इसके कारण किसी को जानकारी भी नहीं होती है कि उन्हें कुछ पैसे भी ड्रेस के लिए दिए जाएंगे। आरटीई के तहत प्रवेश होने के बाद भी अभिभावकों को अपने पैसे लगाकर ही ड्रेस लेने पड़ते हैं।

कोविड के समय किसी कारणों से पैसे नहीं दिए गए थे। अब तक जो भी पैसे बच्चों को नहीं दिए गए हैं। वो सारे पैसे स्कूल अकाउंट में जमा है। सरकारी पैसा है कोई भी अपने पर्सनल अकाउंट में ट्रांसफर नहीं कर सकता। उन पैसों को बच्चे या उनके पैरेंट्स के अकाउंट में ही भेजे जाएंगे। हर साल के ऑडिट में भी इसका जिक्र किया गया है कि पैसे स्कूल अकाउंट में है। पुराने बच्चे जिन्हें पैसे देने हैं उन्हें देख रहे हैं। मैंने अगस्त में जॉइन किया है, जो चीजें समझ में आ रही है उसे पूरा कर रहे हैं। काम स्लो है, लेकिन सभी को उनके पैसे दिए जाएंगे। सत्र 2024-25 का भी पैसा आ गया है उसे भी जल्द ही बच्चों को मिल जाएगा।

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