सीजी भास्कर, 28 जून। वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) को भारतीय टीम में मौका मिले या नहीं, यह बहस अब केवल एक युवा बल्लेबाज तक सीमित नहीं रह गई है। असली सवाल यह है कि टीम इंडिया का चयन केवल मौजूदा प्रदर्शन और वरिष्ठता के आधार पर होना चाहिए या भविष्य की जरूरतों और असाधारण प्रतिभाओं को भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए। 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने जिस तरह कम उम्र में अपनी बल्लेबाजी से क्रिकेट जगत का ध्यान खींचा है, उसने चयनकर्ताओं के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।
रन बनाने वालों को हटाना आसान नहीं
टीम इंडिया में संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा और ईशान किशन जैसे बल्लेबाज लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में केवल नई प्रतिभा को मौका देने के लिए किसी स्थापित खिलाड़ी को बाहर करना आसान फैसला नहीं है। बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक भी मानते हैं कि लगातार रन बनाने वाले खिलाड़ी को केवल नए चेहरे के लिए बाहर करना उचित नहीं होगा। हालांकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में चयन हमेशा पूरी तरह न्यायसंगत नहीं होता। राष्ट्रीय टीम पुरस्कार देने का मंच नहीं बल्कि अगले मैच और भविष्य की योजनाओं को ध्यान में रखकर बनाई जाने वाली टीम होती है।
इतिहास बताता है कि बड़ी प्रतिभाओं को समय पर मौका मिला
क्रिकेट इतिहास इस बात का गवाह है कि कई दिग्गज खिलाड़ियों को कम उम्र में ही मौका दिया गया। अगर केवल वरिष्ठता को प्राथमिकता दी जाती तो विराट कोहली, जसप्रीत बुमराह और महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर जैसे खिलाड़ी भी लंबे समय तक इंतजार करते रहते। चयन का अर्थ ही कई बार कठिन और कठोर फैसले लेना होता है।
सिर्फ रन नहीं, भविष्य भी साथ लेकर आए हैं वैभव
वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) को लेकर चर्चा केवल उनके बनाए गए रनों की वजह से नहीं है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि उनमें असाधारण क्षमता दिखाई देती है। नेट्स में दुनिया के तेज गेंदबाजों के खिलाफ उनका आत्मविश्वास और तकनीक क्रिकेट जगत को प्रभावित कर चुकी है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय क्रिकेट का भविष्य माना जा रहा है।
ड्रेसिंग रूम का भरोसा भी उतना ही जरूरी
दूसरी ओर यह भी सच है कि यदि लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों की जगह सुरक्षित नहीं रहेगी तो ड्रेसिंग रूम में गलत संदेश जाएगा। खिलाड़ी टीम के लिए खुलकर खेलने की बजाय अपनी जगह बचाने की मानसिकता से खेल सकते हैं। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में टी-20 क्रिकेट में जो निडर बल्लेबाजी संस्कृति विकसित की है, उसका आधार खिलाड़ियों का आत्मविश्वास ही रहा है।
2027 विश्व कप की तैयारी अभी से करनी होगी
यदि टीम प्रबंधन मानता है कि वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) वर्ष 2027 वनडे विश्व कप की योजनाओं का हिस्सा बन सकते हैं, तो उनकी तैयारी आखिरी समय पर नहीं बल्कि अभी से शुरू करनी होगी। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अनुभव केवल अभ्यास से नहीं बल्कि मैच खेलने से मिलता है। इसलिए चयनकर्ताओं के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि वे भविष्य की इस प्रतिभा को समय रहते अवसर देंगे या नहीं।
चयनकर्ताओं के सामने सबसे बड़ी परीक्षा
भारतीय क्रिकेट के सामने आज सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह नहीं है कि वैभव सूर्यवंशी का डेब्यू कब होगा, बल्कि यह है कि चयनकर्ता इतिहास बनने का इंतजार करेंगे या समय रहते इतिहास को पहचान लेंगे। क्योंकि कुछ खिलाड़ी टीम में जगह मांगते हैं, जबकि कुछ ऐसे होते हैं जिनके लिए टीम को अपनी जगह बनानी पड़ती है।



