सीजी भास्कर, 19 अप्रैल : छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में हुए वेदांता पावर प्लांट हादसे के बाद दर्ज FIR को लेकर विवाद (Vedanta Sakti Blast FIR Controversy) गहराता जा रहा है। उद्योगपति नवीन जिंदल के बाद अब देश की पहली महिला IPS अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल डॉ. किरण बेदी भी वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई हैं। डॉ. बेदी ने वेदांता को एक ‘नवरत्न’ और ‘राष्ट्रीय संपत्ति’ करार देते हुए प्रशासनिक निर्णयों में अत्यधिक संवेदनशीलता और संयम बरतने की अपील की है। इस (Vedanta Sakti Blast FIR Controversy) ने अब कानूनी और प्रशासनिक हलकों में एक नई बहस छेड़ दी है।
‘जांच से सीखें सबक, न कि छवि खराब करें
पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. किरण बेदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से संगठन के प्रति अपने प्रत्यक्ष अनुभव साझा किए। उन्होंने लिखा, “हाल ही में इस विशाल संगठन का दौरा करने के बाद मैंने देखा कि वहां सुरक्षा और प्रशिक्षण के प्रति जबरदस्त समर्पण है। वेदांता एक राष्ट्रीय संपत्ति है। हमें अपने दृष्टिकोण में बहुत सावधान रहना चाहिए। जांच से सुरक्षा के बेहतर उपाय सामने आएंगे, लेकिन हमें अपने निर्णयों और बयानों में संवेदनशील रहना चाहिए।” डॉ. बेदी का यह बयान इस (Vedanta Sakti Blast FIR Controversy) में निष्पक्ष जांच की मांग को और मजबूती दे रहा है।
नवीन जिंदल का तीखा सवाल
इससे पहले जिंदल स्टील के चेयरमैन और सांसद नवीन जिंदल ने इस मामले में ‘उचित प्रक्रिया’ (Due Process) को दरकिनार किए जाने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसी सरकारी संस्थान (PSU) या रेलवे में हादसा होता है, तो क्या सीधे चेयरमैन का नाम FIR में डाला जाता है? श्री जिंदल ने कहा कि (Vedanta Sakti Blast FIR Controversy) निवेशकों के भरोसे को तोड़ सकता है। उन्होंने जोर दिया कि अनिल अग्रवाल ने शून्य से वैश्विक उद्यम खड़ा किया है और प्लांट के दैनिक संचालन में उनकी कोई भूमिका नहीं थी, ऐसे में बिना साक्ष्य उनका नाम FIR में डालना गलत है।
उद्योग संगठनों की ‘चुप्पी’ पर बरसे जिंदल
नवीन जिंदल ने CII, FICCI और ASSOCHAM जैसे प्रमुख उद्योग निकायों की चुप्पी पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने दो टूक कहा, “जब उचित प्रक्रिया को दरकिनार किया जाता है और निवेशकों के विश्वास को खतरा होता है, तो आपकी चुप्पी तटस्थता नहीं बल्कि आपके मूल दायित्व की विफलता है।” इस (Vedanta Sakti Blast FIR Controversy) के बाद अब इन संगठनों पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट करने का दबाव बढ़ गया है।
23 मृतकों के परिजनों को मुआवजे का वितरण शुरू
विवादों के बीच, कंपनी की ओर से राहत कार्यों में तेजी लाई गई है। सूत्रों के अनुसार, हादसे में जान गंवाने वाले 23 मृतकों के परिजनों को चेक और ऑनलाइन ट्रांसफर के माध्यम से मुआवजे का वितरण शुरू कर दिया गया है। वेदांता प्रबंधन लगातार पीड़ित परिवारों के संपर्क में है ताकि सहायता राशि सीधे उनके हाथों तक पहुंच सके। हालांकि, मुआवजे के साथ-साथ अब सबकी नजरें इस (Vedanta Sakti Blast FIR Controversy) के कानूनी मोड़ पर टिकी हैं कि क्या जांच के बाद FIR से अनिल अग्रवाल का नाम हटाया जाएगा या नहीं।


