सीजी भास्कर, 14 जून : छत्तीसगढ़ में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। मौसम विभाग (Weather Alert Chhattisgarh) ने प्रदेश के कई जिलों के लिए अगले तीन दिनों तक गरज-चमक, बारिश, आकाशीय बिजली और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी जारी की है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश में सक्रिय मौसमी तंत्र के प्रभाव से यह स्थिति बनी हुई है और कई इलाकों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की जा सकती है।
तेज हवाओं और बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग के मुताबिक रविवार से अगले तीन दिनों तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मौसम अस्थिर बना रहेगा। कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होने, आकाशीय बिजली गिरने और तेज अंधड़ चलने की संभावना है। मध्य पाकिस्तान से बांग्लादेश तक फैली द्रोणिका और मानसून पूर्व गतिविधियों के कारण मौसम में लगातार बदलाव देखा जा रहा है।
राजनांदगांव रहा सबसे गर्म, पेंड्रा रोड सबसे ठंडा
शनिवार को प्रदेश का सर्वाधिक अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस राजनांदगांव में दर्ज किया गया। वहीं सबसे कम न्यूनतम तापमान 22.8 डिग्री सेल्सियस पेंड्रा रोड में रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग का मानना है कि आगामी दिनों में बारिश और तेज हवाओं के कारण तापमान में गिरावट आ सकती है।
आंधी-तूफान और वज्रपात से जनहानि
बदलते मौसम के बीच कई जिलों में हादसे भी सामने आए हैं। कोरबा जिले के लेमरू क्षेत्र में आंधी-तूफान के दौरान पेड़ गिरने से 54 वर्षीय शिवरतन माझी की मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गईं।
वहीं कांकेर जिले के अंतागढ़ क्षेत्र में मनरेगा कार्य के दौरान पेड़ के नीचे खड़े ग्रामीणों पर आकाशीय बिजली गिरने से उपसरपंच सहित तीन लोगों की मौत हो गई और पांच अन्य लोग घायल हो गए। कई इलाकों में तेज हवाओं से पेड़ और बिजली के खंभे भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।
रायपुर में भी बदल सकता है मौसम
राजधानी रायपुर में रविवार को आंशिक रूप से बादल छाए रहने, गरज-चमक के साथ हल्की बारिश और धूलभरी आंधी चलने की संभावना जताई गई है। अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।
लोगों के लिए जारी की गई सलाह
मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, पेड़ों, बिजली के खंभों और ऊंचे स्थानों से दूर रहने की अपील की है। किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है ताकि आकाशीय बिजली और तेज हवाओं से होने वाले नुकसान से बचा जा सके।





