सीजी भास्कर, 19 अप्रैल : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के बीच सियासी पारा (Mamata Banerjee on Women Reservation) सातवें आसमान पर पहुंच गया है। महिला आरक्षण विधेयक को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विपक्ष पर लगाए गए आरोपों का मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने करारा जवाब दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक के बाद एक कई पोस्ट कर ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री को सीधे चुनौती देते हुए कहा कि बीजेपी शासित राज्यों को फायदा पहुंचाने के लिए महिलाओं को केवल एक ‘ढाल’ की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे संघीय लोकतंत्र पर हमला करार दिया।
‘आंकड़े देते हैं गवाही, हम कभी नहीं थे विरोधी’
प्रधानमंत्री के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी के ट्रैक रिकॉर्ड को सामने रखा। उन्होंने कहा कि (Mamata Banerjee on Women Reservation) का विरोध करने का सवाल ही पैदा नहीं होता, क्योंकि टीएमसी हमेशा से महिलाओं के उच्च प्रतिनिधित्व की समर्थक रही है। उन्होंने गर्व से कहा कि संसद में टीएमसी की महिला प्रतिनिधियों का अनुपात सबसे अधिक हैलोकसभा में 37.9% और राज्यसभा में 46%। ममता ने तंज कसते हुए कहा कि जिस पार्टी ने खुद महिलाओं को इतना प्रतिनिधित्व दिया हो, वह आरक्षण का विरोध कैसे कर सकती है?
परिसीमन की आड़ में ‘सत्ता हथियाने’ की साजिश!
ममता बनर्जी ने इस पूरे विवाद की जड़ ‘परिसीमन’ (Delimitation) प्रक्रिया को बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार महिलाओं के हित के नाम पर असल में राजनीतिक सीमाओं में हेरफेर करना चाहती है। (Mamata Banerjee on Women Reservation) पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि बीजेपी का असली मकसद उन राज्यों को अधिक प्रतिनिधित्व दिलाना है जहाँ उनका शासन है, ताकि वे अन्य राज्यों की कीमत पर सत्ता हथिया सकें। ममता के अनुसार, यह बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान और देश की एकता के साथ खिलवाड़ है।
‘कायरतापूर्ण और पाखंडी’
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन को ‘कायरतापूर्ण और पाखंडी’ बताया। उन्होंने तीखे लहजे में कहा कि यदि प्रधानमंत्री में साहस है, तो वे संसद के पटल पर आकर इन सवालों का जवाब दें, जहाँ उनकी जवाबदेही तय हो सके। (Mamata Banerjee on Women Reservation) के बहाने उन्होंने केंद्र से पूछा कि अगर सरकार इस नेक काम के लिए गंभीर थी, तो विधेयक पारित होने के 3 साल बाद तक इंतजार क्यों किया गया? चुनाव के ठीक पहले इसे परिसीमन से जोड़कर लागू करने की जल्दबाजी क्या दर्शाती है?
सत्ता फिसलती देख बौखलाई बीजेपी
ममता बनर्जी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री की यह ‘दोहरी चाल’ इस बात का संकेत है कि उन्हें अपनी सत्ता हाथों से फिसलती नजर आ रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तृणमूल कांग्रेस दशकों से महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ती आई है और किसी ऐसे दल से ‘उपदेश’ नहीं सुनेगी जो महिलाओं का सम्मान करना नहीं जानता। इस (Mamata Banerjee on Women Reservation) विवाद ने बंगाल चुनाव से पहले यह साफ कर दिया है कि महिला वोटर ही इस बार सत्ता की चाबी तय करेंगी।


