सीजी भास्कर, 22 अप्रैल : छत्तीसगढ़ के कृषि परिदृश्य में एक क्रांतिकारी बदलाव की सुगबुगाहट सुनाई दे रही है। राज्य के उन हिस्सों में जहाँ पानी की किल्लत और पथरीली जमीन किसानों की चिंता का सबब बनी हुई थी, अब वहां (Green Gold Lemongrass) यानी लेमनग्रास की खुशबू आर्थिक समृद्धि का संदेश लेकर आ रही है। छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के ‘समृद्ध किसान’ विजन के अनुरूप एक ऐसी पहल शुरू की है, जो न केवल किसानों की जेब भरेगी, बल्कि पर्यावरण का भी संरक्षण करेगी।
कम पानी, बंजर जमीन और बंपर मुनाफा
पारंपरिक खेती जैसे धान या गेहूं में पानी की भारी खपत और मेहनत की आवश्यकता होती है, लेकिन लेमनग्रास की खेती इस मामले में बिल्कुल विपरीत है। इसे एक बार लगाने के बाद किसान अगले 5 से 6 वर्षों तक लगातार फसल की कटाई कर सकते हैं। विशेषज्ञों का दावा है कि लेमनग्रास की खेती पारंपरिक फसलों के मुकाबले 3 से 4 गुना अधिक मुनाफा प्रदान करती है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे मवेशी (गाय-बैल) नहीं खाते, जिससे बाड़ लगाने या रखवाली करने का खर्च भी बच जाता है।
‘अब्दुल कलाम’ किस्म: उम्मीदों की नई उड़ान
छत्तीसगढ़ शासन के औषधि पादप बोर्ड ने वैज्ञानिकों द्वारा विकसित लेमनग्रास की उन्नत “अब्दुल कलाम” किस्म (CPK-F2-38) को किसानों के बीच लोकप्रिय बनाने का बीड़ा उठाया है। इस किस्म की विशेषताएं इसे अन्य प्रजातियों से अलग बनाती हैं। इसमें सिट्रल की मात्रा 75 से 80 प्रतिशत तक होती है। उच्च सिट्रल होने के कारण इत्र, सौंदर्य प्रसाधन, फ्लेवर और अरोमा थेरेपी उद्योगों में इस तेल की भारी मांग है। यह किस्म कम वर्षा वाले क्षेत्रों और बलुई दोमट मिट्टी में भी उत्कृष्ट परिणाम देती है।
मुफ्त पौधे और विशेषज्ञ प्रशिक्षण, सरकार की सौगात
जल संकट से जूझ रहे किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए इस योजना को जमीनी स्तर पर उतारा है। बोर्ड के सीईओ जेएसीएस. राव ने बताया कि चिन्हित क्षेत्रों के किसानों को “अब्दुल कलाम” किस्म के पौधे पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, जो किसान नई तकनीक से अनजान हैं, उन्हें बोर्ड की ओर से मुफ्त तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जाएगा ताकि वे फसल की रोपण विधि (40×40 सेमी दूरी) और तेल निकालने की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझ सकें।
पृथ्वी दिवस पर जागरूकता का शंखनाद
आज 22 अप्रैल, पृथ्वी दिवस के अवसर पर औषधि पादप बोर्ड पूरे प्रदेश में एक विशेष जागरूकता अभियान चला रहा है। इस अभियान का मूल मंत्र है— “कम पानी में ज्यादा कमाई और धरती की भलाई”। लेमनग्रास न केवल भूमि के जल स्तर को बचाती है, बल्कि बंजर होती जमीन की उर्वरता में भी सुधार करती है। बोर्ड का लक्ष्य है कि प्रदेश के सुदूर वनांचलों और शुष्क क्षेत्रों के किसानों को इस ‘कैश क्रॉप’ (नकदी फसल) से जोड़कर उनके जीवन स्तर को ऊपर उठाया जाए।
आर्थिक और पर्यावरणीय संतुलन का संगम
लेमनग्रास की खेती से होने वाली आय का सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। एक एकड़ में लेमनग्रास लगाकर किसान साल भर में लाखों रुपये का तेल बेच सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, जल संरक्षण की दिशा में यह फसल किसी क्रांति से कम नहीं है। औषधि पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला के अनुसार, यह पहल किसानों को ‘अन्नदाता’ के साथ-साथ ‘उद्यमी’ बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ का (Green Gold Lemongrass) अभियान न केवल किसानों की तकदीर बदलेगा, बल्कि प्रदेश को ‘हर्बल स्टेट’ के रूप में वैश्विक पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


