सीजी भास्कर, 25 अप्रैल : छत्तीसगढ़ की प्रतिष्ठित गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी (GGV) एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह शिक्षा नहीं बल्कि एक गंभीर विवाद है। लॉ डिपार्टमेंट (Law Department) के कुछ छात्रों द्वारा सोशल मीडिया पर महापुरुषों और आराध्य देवों के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणियों के बाद पूरा कैंपस सुलग उठा है। इस खबर (Bilaspur GGV Controversy News) के सामने आते ही छात्रों में भारी आक्रोश है और माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।
इंस्टाग्राम चैट से शुरू हुआ विवाद
विवाद की जड़ इंस्टाग्राम पर की गई एक निजी चैट बताई जा रही है, जो अब सार्वजनिक हो चुकी है। आरोप है कि लॉ विभाग के कुछ छात्रों ने इस चैट के दौरान भगवान राम, डॉ. भीमराव अंबेडकर, भगवान परशुराम और अन्य महापुरुषों पर बेहद आपत्तिजनक और मर्यादित टिप्पणियां कीं। जैसे ही इन चैट के स्क्रीनशॉट छात्रों के बीच पहुंचे, विश्वविद्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया।
दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग
नाराज छात्रों ने इसे केवल अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि धार्मिक और सामाजिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला कृत्य करार दिया है। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि शैक्षणिक संस्थान में इस तरह की मानसिकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस मामले (Bilaspur GGV Controversy News) में छात्र न केवल विश्वविद्यालय स्तर पर निलंबन की मांग कर रहे हैं, बल्कि दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए थाने पहुँचने की भी तैयारी कर रहे हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने बैठाई जांच
विवाद बढ़ता देख विश्वविद्यालय प्रबंधन तुरंत हरकत में आया है। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच समिति गठित कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर संबंधित छात्रों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इधर, पुलिस भी इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है ताकि कैंपस में शांति व्यवस्था बनी रहे।
सोशल मीडिया आचरण पर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्रों के सोशल मीडिया आचरण और नैतिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा के केंद्र में इस तरह की वैमनस्यता फैलाने वाली टिप्पणियों को लेकर शहर के प्रबुद्ध जनों ने भी चिंता जताई है। इस पूरी घटना (Bilaspur GGV Controversy News) ने विश्वविद्यालय की छवि पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाला है। फिलहाल, कैंपस में तनाव को देखते हुए सुरक्षा बढ़ा दी गई है और सभी की नजरें विश्वविद्यालय प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।


