सीजी भास्कर, 28 अप्रैल : छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में एक शिक्षक द्वारा आत्महत्या किए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। चेरपाल निवासी और प्राथमिक शाला पालनार के प्रधान अध्यापक स्व. राजू पुजारी की दुखद मृत्यु ने पूरे शिक्षा जगत और स्थानीय समाज को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर (Justice for Raju Pujari) की गुहार लगाई है। विधायक ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए ताकि भ्रष्टाचार के इस काले खेल का पर्दाफाश हो सके।
ईमानदार शिक्षक और भ्रष्टाचार का दबाव
स्व. राजू पुजारी अपनी निष्ठा और ईमानदारी के लिए पूरे क्षेत्र में जाने जाते थे। विधायक विक्रम मंडावी ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि प्राथमिक शाला पालनार के नए भवन का निर्माण लगभग 20 लाख 30 हजार रुपये की लागत से किया जा रहा था। इस निर्माण की जिम्मेदारी शाला प्रबंधन समिति की थी, जिसके अध्यक्ष स्वयं राजू पुजारी थे।
परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस मामले में (Justice for Raju Pujari) इसलिए जरूरी है क्योंकि एक ईमानदार शिक्षक को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया गया। विधायक ने पत्र में उल्लेख किया है कि निर्माणाधीन स्कूल भवन का काम पेटी ठेकेदार और इंजीनियर द्वारा बेहद घटिया और गुणवत्ताहीन तरीके से किया जा रहा था। जब शिक्षक ने इस पर आपत्ति जताई, तो उन पर भुगतान के लिए भारी मानसिक दबाव बनाया जाने लगा।
मानसिक प्रताड़ना और सुसाइड नोट का सच
शिक्षक राजू पुजारी गुणवत्ताहीन कार्य के लिए सरकारी राशि का भुगतान नहीं करना चाहते थे। उन्होंने इसकी शिकायत अपने उच्चाधिकारियों से भी की थी, लेकिन अफसोस कि अधिकारियों ने उनकी जायज शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया।
उल्टा संबंधित विभाग के अधिकारियों और इंजीनियरों ने ठेकेदार के पक्ष में खड़े होकर शिक्षक को ही प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। विधायक का दावा है कि (Justice for Raju Pujari) सुनिश्चित करने के लिए उस सुसाइड नोट की गहराई से जांच होनी चाहिए, जिसे लिखने के बाद 22 अप्रैल 2026 को शिक्षक ने आत्मघाती कदम उठाया।
सुसाइड नोट में विभाग के कुछ अधिकारियों, कर्मचारियों और पेटी ठेकेदार के नामों का स्पष्ट उल्लेख है। शिक्षक ने मरने से पहले अपनी पीड़ा बयां की थी कि कैसे उन्हें पूरी राशि निकालने के लिए मजबूर किया गया।
भ्रष्टाचार की परतें और सरकारी दस्तावेजों का हवाला
विधायक विक्रम मंडावी ने पत्र में सरकारी दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि शाला प्रबंधन समिति की पंजी के अनुसार, बीजापुर निवासी मुख्य ठेकेदार जागर लक्ष्मैया का नाम सामने आया है। चेक पंजी में भी इसका उल्लेख है कि ठेकेदार के कहने पर ही पेटी ठेकेदार को राशि आहरण के लिए चेक प्रदान किए गए। यह पूरी प्रक्रिया भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है, जिसे रोकने की कोशिश में शिक्षक ने अपनी जान गंवा दी। मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि (Justice for Raju Pujari) के लिए इस वित्तीय गड़बड़ी की भी जांच हो।
शिक्षक पर दबाव डाला गया कि वे निर्माणाधीन स्कूल भवन की पूरी राशि निकालकर ठेकेदार को सौंप दें। अधिकारियों की संलिप्तता के बिना यह संभव नहीं था, इसलिए विधायक ने इस मामले में बड़े अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की आवश्यकता
बीजापुर विधायक ने मुख्यमंत्री को स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि स्व. राजू पुजारी की आत्महत्या कोई सामान्य घटना नहीं है, बल्कि यह भ्रष्टाचार और प्रशासनिक प्रताड़ना का नतीजा है। इस मामले में (Justice for Raju Pujari) तभी संभव है जब एक स्वतंत्र न्यायिक आयोग इसकी जांच करे। उन्होंने मांग की है कि सुसाइड नोट में नामजद सभी व्यक्तियों, जिनमें अधिकारी और ठेकेदार शामिल हैं, के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए।
विधायक मंडावी ने कहा कि यदि एक सम्मानित और ईमानदार शिक्षक को इस तरह आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ता है, तो यह लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है। उन्होंने पत्र के माध्यम से (Justice for Raju Pujari) की मांग दोहराते हुए दोषियों को नौकरी से बर्खास्त करने की भी अपील की है।
क्षेत्र में आक्रोश और आंदोलन की सुगबुगाहट
शिक्षक राजू पुजारी की आत्महत्या के बाद बीजापुर क्षेत्र के ग्रामीणों और शिक्षक संघ में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर सरकार ने जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं की और (Justice for Raju Pujari) सुनिश्चित नहीं किया, तो वे सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे। विधायक ने भी चेतावनी दी है कि वे पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेंगे।
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में विधायक ने यह भी आग्रह किया है कि पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए, क्योंकि परिवार ने अपना कमाऊ सदस्य खो दिया है।



