सीजी भस्कर, 02 मई । ओमान की खाड़ी से जुड़ी खबरों ने अंतरराष्ट्रीय हलकों में हलचल बढ़ा (US Blockade) दी है। तेल व्यापार से जुड़े लोग और विशेषज्ञ इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इसका असर सीधे वैश्विक बाजार और कीमतों पर पड़ सकता है। लगातार आ रही जानकारी ने यह साफ कर दिया है कि मामला सिर्फ समुद्री गतिविधि तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़ी रणनीतिक वजहें भी हैं।
इधर आम लोगों के बीच भी चर्चा तेज है कि आखिर इस हालात का असर आने वाले समय में तेल की कीमतों और अर्थव्यवस्था पर कितना पड़ेगा। कई जानकार इसे दबाव बनाने की रणनीति बता रहे हैं, जिससे हालात और ज्यादा जटिल होते जा रहे हैं।
खाड़ी में फंसे टैंकर (US Blockade)
Gulf of Oman में अमेरिकी सैन्य नाकेबंदी के चलते हालात बिगड़ गए हैं। Iran का तेल लेकर जा रहे कई टैंकर रास्ते में ही अटक गए हैं, जिससे बड़ी मात्रा में माल फंसा हुआ है। जानकारी के मुताबिक करीब 31 टैंकर ऐसे हैं जिनमें लाखों बैरल कच्चा तेल मौजूद है और वे अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
अरबों डॉलर की पेमेंट अटकी
United States Department of Defense के आकलन के अनुसार इस स्थिति की वजह से ईरान को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। बताया जा रहा है कि लगभग 4.8 बिलियन डॉलर की पेमेंट अटक गई है। यह नुकसान उस समय हो रहा है जब दोनों देशों के बीच तनाव पहले से ही बना हुआ है और आर्थिक दबाव लगातार बढ़ाया जा रहा है।
सख्त नाकेबंदी का असर
अधिकारियों के मुताबिक नाकेबंदी लागू होने के बाद कई जहाजों को रास्ता बदलने के लिए मजबूर किया (US Blockade) गया है। 40 से ज्यादा जहाज ऐसे हैं जिन्हें बीच रास्ते से वापस मोड़ा गया या उनका रूट बदल दिया गया। कुछ जहाजों को तो पूरी तरह से जब्त भी कर लिया गया, जिससे हालात और ज्यादा गंभीर हो गए हैं।
स्टोरेज की समस्या बढ़ी
मौजूदा हालात में नए टैंकर ईरानी तेल लोड नहीं कर (US Blockade) पा रहे हैं। वहीं जमीन पर मौजूद भंडारण सुविधाएं भी अपनी अधिकतम क्षमता तक भर चुकी हैं। से में ईरान को पुराने जहाजों को ही अस्थायी स्टोरेज के रूप में इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जो यह दिखाता है कि नाकेबंदी का असर अब जमीनी स्तर पर साफ नजर आने लगा है।
वैकल्पिक रास्तों का सहारा
कुछ टैंकरों ने अपने तेल को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए लंबे और महंगे रास्तों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। खासकर चीन तक पहुंचने के लिए अलग मार्ग अपनाए जा रहे हैं, जिससे लागत और समय दोनों बढ़ रहे हैं।


