सीजी भास्कर, 05 मई : पश्चिम बंगाल में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद ‘इंडिया’ गठबंधन के भीतर मचे घमासान ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। एक ओर जहां कांग्रेस के कई स्थानीय नेता टीएमसी की हार पर जश्न मना रहे हैं, वहीं राहुल गांधी खुलकर ममता बनर्जी के पक्ष में खड़े हो गए हैं। राहुल गांधी का समर्थन ममता (Rahul Gandhi Support Mamata) को मिलना इस वक्त की सबसे बड़ी राजनीतिक खबर है, क्योंकि उन्होंने अपनी ही पार्टी के नेताओं को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा है कि यह खुशी मनाना शर्मनाक है। राहुल ने बंगाल के नतीजों को लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए ‘जनादेश की चोरी’ का बड़ा आरोप लगाया है।
जनादेश लूटा गया, छोटी राजनीति बंद करो
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर बेहद कड़े शब्दों में अपनी बात रखी। उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के जो नेता टीएमसी की हार पर खुश हो रहे हैं, वे भाजपा के मंसूबों को नहीं समझ रहे हैं। राहुल गांधी का समर्थन ममता (Rahul Gandhi Support Mamata) को देते हुए उन्होंने दावा किया कि बंगाल में 100 से ज्यादा सीटों पर धांधली हुई है। राहुल ने नेताओं को चेतावनी दी कि यह समय आपसी खींचतान का नहीं बल्कि एकजुट होकर लड़ने का है। उनके मुताबिक, भाजपा का मिशन लोकतंत्र को खत्म करना है और ऐसे में विपक्षी दलों का एक-दूसरे की हार पर खुश होना आत्मघाती है।
“ममता ने खुद बुलाई तबाही”
एक तरफ राहुल गांधी दिल्ली से गठबंधन बचाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं बंगाल में कांग्रेस के कद्दावर नेता अधीर रंजन चौधरी के तेवर पूरी तरह बदले हुए हैं। अधीर ने राहुल के रुख के विपरीत ममता बनर्जी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने खुद भाजपा के लिए ‘लाल कारपेट’ बिछाया था। उन्होंने टीएमसी की हार को उनके अपने कर्मों का फल बताया। इस विरोधाभास के बीच राहुल गांधी का समर्थन ममता (Rahul Gandhi Support Mamata) को मिलना यह संकेत देता है कि हाईकमान ममता के साथ रिश्ते खराब नहीं करना चाहता, भले ही राज्य इकाई इसके खिलाफ हो।
प्रियंका चतुर्वेदी ने भी गठबंधन के ‘गद्दारों’ को घेरा
शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी राहुल गांधी के सुर में सुर मिलाया है। उन्होंने कहा कि टीएमसी और डीएमके की हार पर ‘इंडिया’ ब्लॉक के भीतर हो रही खुशी शर्मनाक है। प्रियंका ने सचेत किया कि यह फूट सीधे तौर पर भाजपा को फायदा पहुंचा रही है। उन्होंने याद दिलाया कि 2024 में सभी दलों ने मिलकर अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन अब एक-दूसरे की हार पर तंज कसना गठबंधन के मूल मकसद को भूल जाने जैसा है। फिलहाल, राहुल के इस हस्तक्षेप के बाद गठबंधन के भीतर मची रार शांत होती है या नहीं, यह देखना दिलचस्प होगा।


