सीजी भास्कर, 21 मई : छत्तीसगढ़ के प्राइवेट स्कूलों द्वारा फीस बढ़ोतरी (Private School Fee Regulation) और महंगी किताबें यूनिफॉर्म जबरन बेचने के खेल पर अब सरकार ने बेहद कड़ा और आक्रामक रुख अपना लिया है। पालकों से हो रही इस खुली लूट पर छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने कड़ा एक्शन लेते हुए जिला और विकासखंड स्तर पर हाई-पावर निगरानी एवं जांच समितियों (Private School Fee Regulation) का गठन कर दिया है।
शासन के संज्ञान में आया है कि कुछ अशासकीय विद्यालय पालकों को किसी एक विशेष दुकान या फर्म से ही महंगी सामग्री खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं, जिससे आम जनता पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
अखबारों और सोशल मीडिया पर लगातार आ रही शिकायतों के बाद स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने इस काले कारोबार को ध्वस्त करने के लिए कड़ा चक्रव्यूह (प्राइवेट स्कूल फीस रेगुलेशन) तैयार किया है। अब हर जिले में कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और सहायक आयुक्त GST की एक संयुक्त टीम सीधे स्कूलों पर धावा बोलेगी।
वहीं, विकासखंड स्तर पर एसडीएम (SDO), ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) और जीएसटी इंस्पेक्टरों का जांच दल तैनात किया गया है। यह तगड़ी चौकड़ी इस बात की बारीकी से जांच करेगी कि स्कूल कहीं कमिशनखोरी के चक्कर में पालकों की जेब तो नहीं काट रहे हैं।
इसके साथ ही, स्कूलों द्वारा हर साल अपनी मर्जी से बढ़ाई जाने वाली भारी-भरकम फीस पर भी सरकार ने स्वतः संज्ञान लिया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि ‘छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय फीस विनियमन विधेयक-2020′ के सख्त प्रावधानों के तहत अब इन मनमानी करने वाले स्कूलों पर कड़ी कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्टर्स को निर्देश दिए गए हैं कि वे बिना किसी ढिलाई के इस नए नियम (Private School Fee Regulation) को जमीन पर लागू करें। साफ चेतावनी है कि यदि कोई भी स्कूल प्रबंधन किसी खास दुकान से सामान खरीदने का दबाव बनाते पाया गया, तो उसकी मान्यता रद्द करने के साथ-साथ भारी जुर्माना भी ठोक दिया जाएगा।



