सीजी भास्कर, 23 मई : संजय दत्त की बड़ी बेटी त्रिशला दत्त (Sanjay Dutt Daughter) फिल्मी दुनिया से दूर न्यूयॉर्क में रहती हैं। त्रिशला, संजय दत्त और उनकी पहली पत्नी ऋचा शर्मा की बेटी हैं। ऋचा शर्मा का साल 1996 में निधन हो गया था। मां के गुजर जाने के बाद संजय दत्त ही त्रिशला की जिंदगी बन गए। दूर रहकर भी त्रिशला और संजय दत्त एक-दूसरे के साथ बेहद खास रिश्ता साझा करते हैं। अब त्रिशला दत्त ने अपने पिता के सबसे मुश्किल दौर को याद करते हुए बड़ा खुलासा किया है।
पिता के बारे में क्या बोलीं त्रिशला दत्त
दरअसल, संजय दत्त पर 1993 मुंबई बम धमाकों से जुड़े एके-56 राइफल और 9 एमएम पिस्टल जैसे प्रतिबंधित हथियार रखने का आरोप लगा था। उस समय त्रिशला दत्त (Sanjay Dutt Daughter) महज पांच साल की थीं। इसके तीन साल बाद उन्होंने अपनी मां ऋचा शर्मा को भी खो दिया था। इतनी छोटी उम्र में जिंदगी के बड़े दर्द देखने के बावजूद त्रिशला का कहना है कि उन्होंने अपने पिता को कभी किसी बात के लिए दोष नहीं दिया।
एक बातचीत के दौरान त्रिशला दत्त ने अपने पिता के संघर्ष और मुश्किल भरे दौर को याद किया। उन्होंने कहा कि संजय दत्त ने बेहद कम उम्र में नशे की लत से लड़ाई लड़ी, उससे बाहर निकले, फिर जेल गए, बाहर आए और दोबारा जेल जाना पड़ा। त्रिशला ने कहा कि वह सोच भी नहीं सकतीं कि उस दौर में उनके पिता ने किस तरह खुद को संभाला होगा।
किन-किन हालातों से गुजरे संजय दत्त
त्रिशला दत्त (Sanjay Dutt Daughter) ने आगे बताया कि जब पूरी दुनिया उनके परिवार के संघर्ष को देख रही थी, तब हालात को संभालना बेहद मुश्किल हो गया था। उन्होंने कहा कि वह उस समय अपने पिता से खुलकर बात भी नहीं कर पाती थीं। जब भी वह फोन करती थीं, संजय दत्त किसी ना किसी संकट से गुजर रहे होते थे और उनके आसपास हमेशा लोग मौजूद रहते थे। ऐसे में निजी बातें करना आसान नहीं था।
त्रिशला ने कहा कि लोगों की नजरें लगातार उनके परिवार पर टिकी रहती थीं। हर कोई यह देखना चाहता था कि वह अपने पिता की परेशानियों पर कैसी प्रतिक्रिया देती हैं। लेकिन उन्होंने हमेशा अपने पिता के लिए मजबूत बने रहने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि वह अपने पिता से कभी नाराज नहीं रहीं, क्योंकि संजय दत्त ने हर परिस्थिति में अपनी तरफ से सबसे बेहतर करने की कोशिश की।
त्रिशला दत्त ने उस दौर को भी याद किया जब कई लोग संजय दत्त की बर्बादी का जश्न मनाते थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी आंखों से देखा और पढ़ा कि लोग उनके पिता के जेल जाने और मुश्किलों पर खुशी जाहिर कर रहे थे। उनके मुताबिक हर व्यक्ति की अपनी राय होती है, लेकिन एक बेटी के लिए वह दौर बेहद दर्दनाक था।
तमाम संघर्षों के बावजूद त्रिशला ने कहा कि उन्होंने अपने पिता से जिंदगी के दो सबसे बड़े सबक सीखे हैं। पहला, जरूरतमंद लोगों की हमेशा मदद करनी चाहिए। दूसरा, कभी किसी इंसान को खुद से छोटा नहीं समझना चाहिए। उनके मुताबिक विनम्रता ही इंसान की असली पहचान होती है।



