सीजी भास्कर, 23 मई : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शुक्रवार को सुशासन तिहार के तहत आयोजित ग्राम करहीबाजार शिविर में पहुंचे, जहां उन्होंने किसानों से सीधे संवाद कर खेती-किसानी से जुड़ी योजनाओं और नई कृषि तकनीकों की जानकारी ली। शिविर में लगाए गए विभागीय स्टॉलों का अवलोकन करते हुए मुख्यमंत्री ने हितग्राहियों और किसानों से चर्चा की तथा प्राकृतिक खेती और वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि खेती में रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना समय की जरूरत है। उन्होंने किसानों से डीएपी और यूरिया के विकल्प के रूप में (Nano Urea) नैनो यूरिया और हरी खाद को अपनाने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती आने वाले समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बनने जा रही है और इससे खेती की लागत कम होने के साथ जमीन की उर्वरा क्षमता भी सुरक्षित रहेगी।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने पिछले पांच वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहे सिंगारपुर निवासी विष्णु ध्रुव के कार्यों की सराहना की। उन्होंने विष्णु ध्रुव से खेती के तरीकों और उत्पादन के बारे में विस्तार से जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे किसान दूसरों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने भाटापारा विकासखंड में संचालित (Bio Input Resource Center) बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष रजनी निषाद से भी बातचीत की। उन्होंने समूह द्वारा किए जा रहे कार्यों और जैविक खेती को बढ़ावा देने के प्रयासों की जानकारी ली।
कृषि विभाग द्वारा शिविर में लघुधान्य फसलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लगाए गए प्रदर्श का भी मुख्यमंत्री ने अवलोकन किया। विभाग की ओर से किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों और प्राकृतिक खेती से जुड़ी सामग्रियों का वितरण किया गया।
शिविर में किसानों को निःशुल्क (Nano Urea) नैनो यूरिया वितरित किया गया। इसका लाभ लोकनाथ जांगड़े, तीरथ राम जायसवाल, दिल कुमारी यादव, मानकी पटेल और रजनी निषाद सहित कई किसानों को मिला। वहीं 50 प्रतिशत अनुदान पर हरी खाद के रूप में मूंग और बेंचा बीज का वितरण भी किया गया। इसका लाभ ग्राम रमदैया के दिलीप वर्मा, ग्राम केसला के राजेंद्र रजक और ग्राम मल्दी के भोलाराम वर्मा को दिया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। आधुनिक तकनीक और प्राकृतिक खेती के समन्वय से कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।



