सीजी भास्कर, 23 मई। बस्तर संभाग के अलग अलग जिलों से शुक्रवार को बड़ी संख्या में आदिवासी ग्रामीण दिल्ली के लिए रवाना (D Listing) हुए। गांवों से निकलते समय लोगों में अलग तरह का उत्साह और चर्चा देखने को मिली। कई जगह पारंपरिक वेशभूषा में लोग एकजुट होकर पहुंचे और धर्मांतरण तथा आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर अपनी नाराजगी जाहिर करते नजर आए।
आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक क्षेत्र का मामला नहीं बल्कि आदिवासी समाज की पहचान और अधिकारों से जुड़ा बड़ा विषय है। दिल्ली पहुंचकर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने की तैयारी की गई है, जिसमें धर्मांतरित परिवारों को अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति के आरक्षण लाभ से बाहर करने की मांग उठाई जाएगी।
सात जिलों से पहुंचे ग्रामीण : D Listing
जानकारी के अनुसार बस्तर संभाग के सातों जिलों से करीब 1200 आदिवासी ग्रामीण दिल्ली के लिए रवाना हुए हैं। बताया जा रहा है कि 24 मई को राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा जाएगा। आंदोलन में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है।
देशभर से समर्थन मिलने का दावा
सर्व आदिवासी समाज से जुड़े नेताओं का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर देशभर के आदिवासी समाज में समर्थन बढ़ रहा है। दावा किया गया है कि लाखों लोग इस अभियान से जुड़े हुए हैं और आने वाले समय में आंदोलन और बड़ा हो सकता है।
धर्मांतरण को बताया बड़ी चुनौती
आंदोलन से जुड़े लोगों ने आरोप लगाया कि कई इलाकों में प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। उनका कहना है कि इससे आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उन्होंने इसे बस्तर क्षेत्र की बड़ी समस्या बताया।
आरक्षण लाभ पर उठाए सवाल
आंदोलनकारियों का कहना है कि धर्मांतरण के बाद भी कई परिवार आरक्षण और सरकारी योजनाओं का लाभ (D Listing) ले रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर डी लिस्टिंग की मांग तेज की जा रही है। उनका कहना है कि इस विषय पर स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए।
अवैध चर्च संचालन का आरोप
कुछ इलाकों में अवैध तरीके से चर्च संचालन होने के भी आरोप लगाए गए हैं। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि इसी वजह से आदिवासी समाज में नाराजगी बढ़ रही है और लोग खुलकर विरोध दर्ज कराने लगे हैं।
स्वास्थ्य कारणों से शामिल नहीं होंगे नेता
आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ नेता स्वास्थ्य कारणों से दिल्ली नहीं (D Listing) जा पाएंगे, लेकिन उन्होंने इस मुद्दे पर राष्ट्रपति को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की है। वहीं दिल्ली जाने वाले ग्रामीणों में आंदोलन को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है।



