सीजी भास्कर, 24 मई : कभी नक्सलियों के खौफ और बंदूक की गूंज से पहचाने जाने वाले बस्तर (Bastar Development) के दूरस्थ वनांचल अब सुशासन और विकास की नई कहानी लिख रहे हैं। सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड के उन गांवों में, जहां वर्षों तक प्रशासन की पहुंच बेहद सीमित रही, अब खुद जिला प्रशासन बाइक पर सवार होकर पहुंच रहा है।
कलेक्टर अमित कुमार और जिला पंचायत सीईओ मुकुंद ठाकुर ने शुक्रवार को धुर नक्सल प्रभावित और पहुंचविहीन गांव भेज्जी, मैलापुर, दंतेशपुरम, बुर्कलंका, गछनपल्ली, बोदराजपदर और डब्बाकोंटा का ऐतिहासिक दौरा किया। उबड़-खाबड़, पथरीले और जंगलों से घिरे रास्तों को पार करते हुए जब अधिकारी ग्रामीणों तक पहुंचे, तो गांवों में उत्साह का माहौल बन गया। कई ग्रामीणों ने पहली बार किसी कलेक्टर को अपने गांव में देखा।
चौपाल में बैठकर सुनी समस्याएं
दौरे के दौरान अधिकारियों (Bastar Development) ने बुर्कलंका में निर्माणाधीन ‘सुशासन परिसर’ का निरीक्षण किया। घने जंगलों के बीच बन रहे इस परिसर में स्कूल, आंगनबाड़ी, पंचायत भवन, पीडीएस सेंटर और सामुदायिक भवन को एक ही परिसर में विकसित किया जा रहा है। कलेक्टर अमित कुमार ने इसे दूरस्थ क्षेत्रों के लिए आदर्श मॉडल बताया। मैलासुर पंचायत में आयोजित चौपाल में अधिकारियों ने जमीन पर बैठकर ग्रामीणों, सरपंच, पटेल और मुखियाओं से सीधे संवाद किया। ग्रामीणों ने वर्षों से लंबित समस्याएं बताईं, जिन पर अधिकारियों ने मौके पर ही कार्रवाई के निर्देश दिए।
गांवों में खुलेंगे नए स्वास्थ्य केंद्र
प्रशासन का फोकस ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने पर रहा। भेज्जी पंचायत में उप स्वास्थ्य केंद्र की स्वीकृति दी गई, जबकि मैलासुर में स्वास्थ्य केंद्र के लिए जमीन चिन्हित करने के निर्देश दिए गए। गछनपल्ली में स्वास्थ्य कर्मियों के लिए स्टाफ क्वार्टर बनाने की मंजूरी भी दी गई। शिक्षा के क्षेत्र में दंतेषपुरम के निर्माणाधीन प्राथमिक स्कूल भवन को बारिश से पहले हर हाल में पूरा करने का आदेश जारी किया गया। अंदरूनी गांवों के स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए भी सख्त निर्देश दिए गए।
मछली पालन से बदलेगी गांवों की तस्वीर
ग्रामीणों की मांग पर प्रशासन (Bastar Development) ने आजीविका और जल प्रबंधन को लेकर भी बड़े फैसले किए। मैलासुर और दंतेषपुरम में मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए तालाबों का चिन्हांकन किया गया और मछली बीज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। दंतेषपुरम में नया डैम और तालाब निर्माण को मंजूरी मिली, जबकि क्रेड़ा विभाग को पानी टंकी निर्माण के निर्देश दिए गए। पेयजल संकट दूर करने के लिए मैलासुर और बोदराजपदर में नए हैंडपंप और बोरिंग स्वीकृत किए गए। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को निर्देश दिया गया कि जहां जल जीवन मिशन के कार्य पूरे हो चुके हैं, वहां तत्काल जलापूर्ति शुरू की जाए।
अब गांवों तक पहुंचेगी पक्की सड़क
दूरस्थ गांवों को मुख्य सड़क नेटवर्क से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। बोदराजपदर, मैलासुर, दंतेशपुरम, गछनपल्ली और बुर्कलंका तक सड़क पहुंचाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। डब्बाकोंटा में निर्माणाधीन आश्रम का भी निरीक्षण किया गया। कलेक्टर अमित कुमार ने कहा कि नक्सलवाद के प्रभाव से बाहर निकल चुके अंतिम छोर के गांवों तक विकास पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बारिश से पहले सड़क, स्कूल, अस्पताल, पुल-पुलिया और जल जीवन मिशन के कार्य गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएंगे।
बंदूक नहीं, अब विकास बनेगा बस्तर की पहचान
सुकमा के इन गांवों में प्रशासन का बाइक सफर सिर्फ निरीक्षण नहीं, बल्कि विश्वास बहाली का अभियान बन गया। वर्षों तक उपेक्षित रहे ग्रामीण इलाकों में अब विकास, सुशासन और सरकारी योजनाओं की सीधी पहुंच दिखाई दे रही है। बस्तर अब उस दौर से बाहर निकलता दिख रहा है, जहां उसकी पहचान सिर्फ नक्सलवाद से होती थी। अब यहां की नई तस्वीर विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और सुशासन की बन रही है।



