सीजी भास्कर, 10 जून : दुर्ग जिले में प्रस्तावित ईस्ट-वेस्ट डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (Durg Freight Corridor) परियोजना को लेकर प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। परियोजना की जद में आने वाले 25 गांवों में जमीन की खरीदी-बिक्री, नामांतरण, बंटवारा (खाता विभाजन) और भूमि उपयोग परिवर्तन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। कलेक्टर के आदेश के बाद प्रभावित क्षेत्रों में जमीन से जुड़े सभी लेन-देन अगली सूचना तक प्रतिबंधित रहेंगे।
फ्रेट कॉरिडोर के लिए जमीन सुरक्षित रखने का फैसला
प्रशासन के अनुसार यह कदम डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) की मांग पर उठाया गया है। प्रस्तावित ईस्ट-वेस्ट डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर देश की सबसे महत्वपूर्ण रेल माल परिवहन परियोजनाओं में से एक है, जो पश्चिम बंगाल के दानकुनी से गुजरात तक विकसित की जाएगी।
करीब 2100 से 2200 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर के जरिए पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गुजरात के औद्योगिक एवं खनिज क्षेत्रों को हाई-स्पीड माल परिवहन नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इससे उद्योगों को बड़ी राहत मिलने के साथ माल ढुलाई की लागत भी कम होने की संभावना है।
अब बिना अनुमति नहीं होंगे जमीन संबंधी काम
कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के तहत प्रभावित गांवों में फिलहाल किसी भी प्रकार की जमीन खरीदी-बिक्री, नामांतरण, बंटवारा और डायवर्सन की प्रक्रिया नहीं की जाएगी।
हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति को अत्यावश्यक परिस्थिति में भूमि संबंधी कार्य कराना हो तो वह कलेक्टर कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत कर सकता है। संबंधित विभागों और परियोजना एजेंसी की राय लेने के बाद मामले-दर-मामले निर्णय लिया जाएगा।
दुर्ग, पाटन और भिलाई-3 तहसील के 25 गांव प्रभावित
आदेश के अनुसार दुर्ग, पाटन और भिलाई-3 तहसील के कुल 25 गांव प्रतिबंधित क्षेत्र में शामिल किए गए हैं।
दुर्ग तहसील: बिरेझर, चंगोरी, कोनारी, चंदखुरी, हनोदा, खम्हरिया, उमरपोटी, उतई और डुमरडीह।
पाटन तहसील: परेवाडीह, पहंडोर, औंधी, मगरघटा, बेन्द्री, नारधी, महकाकला, महकाखुर्द, कुरूदडीह और बटंग।
भिलाई-3 तहसील: सिरसाकला, परसदा (पाहंदा), सोमनी, गनियारी, देवबलोदा और उरला।
भूमि कारोबारियों और किसानों की बढ़ी चिंता
प्रशासन के इस फैसले के बाद प्रभावित गांवों में जमीन कारोबार से जुड़े लोगों और किसानों के बीच चर्चा तेज हो गई है। कई ग्रामीणों का कहना है कि जमीन संबंधी कार्य फिलहाल रुकने से उन्हें इंतजार करना पड़ेगा, जबकि प्रशासन का तर्क है कि परियोजना से जुड़े भूमि अधिग्रहण और सर्वे कार्य को पारदर्शी व विवादमुक्त बनाने के लिए यह कदम जरूरी है।
परियोजना से मिलेगी औद्योगिक विकास को रफ्तार
विशेषज्ञों का मानना है कि ईस्ट-वेस्ट फ्रेट कॉरिडोर के पूरा होने के बाद छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों के औद्योगिक और खनिज क्षेत्रों को बड़ा फायदा मिलेगा। तेज माल परिवहन, लॉजिस्टिक लागत में कमी और निवेश बढ़ने से रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो सकते हैं।



