सीजी भास्कर, 15 जून। जून का महीना धार्मिक दृष्टि से कई महत्वपूर्ण तिथियां लेकर (Vat Purnima) आ रहा है। श्रद्धालुओं के बीच विशेष रूप से उस दिन को लेकर उत्सुकता बढ़ रही है, जिसे सनातन परंपरा में बेहद शुभ माना जाता है। मंदिरों और धार्मिक स्थलों में भी इस अवसर की तैयारियों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
व्रत और पूजा पाठ करने वाले लोगों के बीच इस पर्व की तारीख और शुभ मुहूर्त जानने की उत्सुकता बनी हुई है। खासकर विवाहित महिलाएं इस दिन से जुड़े अनुष्ठानों की तैयारी पहले से शुरू कर देती हैं। ज्येष्ठ माह की यह पूर्णिमा कई धार्मिक मान्यताओं और विशेष आयोजनों से जुड़ी मानी जाती है।
कब मनाई जाएगी ज्येष्ठ पूर्णिमा : Vat Purnima
इस वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा 29 जून 2026 को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि का आरंभ 29 जून को सुबह 3 बजकर 6 मिनट पर होगा और इसका समापन 30 जून को सुबह 5 बजकर 26 मिनट पर होगा। इस दिन चंद्रमा का उदय शाम 7 बजकर 16 मिनट पर होगा।
सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व
ज्येष्ठ पूर्णिमा को वट पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस अवसर पर अनेक सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु और सुख समृद्धि की कामना के साथ व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन वट वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व माना गया है।
ये रहेंगे प्रमुख शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 6 मिनट से 4 बजकर 46 मिनट तक रहेगा।
प्रातः संध्या सुबह 4 बजकर 26 मिनट से 5 बजकर 26 मिनट तक रहेगी।
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा।
विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 44 मिनट से 3 बजकर 40 मिनट तक रहेगा।
गोधूलि मुहूर्त शाम 7 बजकर 22 मिनट से 7 बजकर 42 मिनट तक रहेगा।
अमृत काल रात 8 बजकर 53 मिनट से 10 बजकर 40 मिनट तक रहेगा।
पूर्णिमा पर क्या करें
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन पवित्र नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है। यदि नदी स्नान संभव न हो तो स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया (Vat Purnima) जा सकता है। इसके बाद व्रत का संकल्प लेकर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, भगवान शिव और चंद्र देव की पूजा की जाती है। रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने का भी विशेष महत्व बताया गया है। कई श्रद्धालु इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा का आयोजन भी करते हैं।
व्रत में क्या खा सकते हैं
पूर्णिमा व्रत के दौरान फलाहार किया जा सकता है। इसमें फल, दूध, पनीर, मखाना, काजू, बादाम, लौकी, खीरा और टमाटर जैसी चीजों का सेवन किया जाता है। कई लोग पूरे दिन केवल जल ग्रहण कर भी व्रत रखते हैं। इस व्रत में सामान्य अन्न का सेवन नहीं किया जाता।
इस दिन मनाए जाएंगे अन्य पर्व
ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर कबीरदास जयंती और बटुक भैरवी जयंती का भी विशेष महत्व माना (Vat Purnima) जाता है। इसलिए यह तिथि धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।





